आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने की दिशा में नई सुविधा शुरू की गई है। रेडियोडायग्नोसिस विभाग में शुक्रवार को पीएसीएस (PACS) यानी पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम का शुभारंभ किया गया।
इस डिजिटल प्रणाली से रेडियोलॉजी जांच की इमेज कंप्यूटर पर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे मरीजों की जांच रिपोर्ट तक चिकित्सकों की पहुंच आसान होगी। इमरजेंसी, आईसीयू और अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों के इलाज में भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. प्रशांत गुप्ता ने फीता काटकर सेवा का उद्घाटन किया।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-sn-medical-college-digital-radiology-pacs-service/
अब डिजिटल स्क्रीन पर देख सकेंगे जांच की इमेज
सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में शुरू की गई पीएसीएस सेवा का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना और चिकित्सकों तक रेडियोलॉजी इमेज जल्दी पहुंचाना है। इस प्रणाली के माध्यम से सीटी स्कैन, एमआरआई और डिजिटल एक्स-रे की इमेज डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी। चिकित्सक कंप्यूटर सिस्टम या डिजिटल स्क्रीन पर इन्हें देखकर मरीज की स्थिति का आकलन कर सकेंगे।
अभी तक रेडियोलॉजी जांच में इमेज देखने के लिए फिल्म या अन्य माध्यमों पर निर्भरता होने से प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। पीएसीएस प्रणाली के माध्यम से डिजिटल इमेज तक पहुंच आसान होगी। इससे चिकित्सकों को जांच के परिणामों के आधार पर आगे के उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकेगी।

कॉलेज में इस सेवा की शुरुआत को मरीजों के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर उन मरीजों के लिए यह उपयोगी हो सकती है, जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय निर्णय की जरूरत होती है।
इमरजेंसी और आईसीयू के मरीजों को मिलेगी मदद
अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों के उपचार में समय की अहम भूमिका होती है। इमरजेंसी, आईसीयू और विभिन्न वार्डों में तैनात चिकित्सकों को मरीज की जांच से जुड़ी इमेज जल्द उपलब्ध होने पर उपचार के अगले चरण का निर्णय लेने में सुविधा मिल सकती है।
पीएसीएस प्रणाली के माध्यम से संबंधित चिकित्सक अपने कंप्यूटर सिस्टम या डिजिटल स्क्रीन पर रेडियोलॉजी इमेज देख सकेंगे। इससे जांच की फिल्म उपलब्ध कराने के लिए इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है। गंभीर मरीजों की स्थिति में चिकित्सकों को जांच संबंधी जानकारी जल्दी मिलने से इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, डिजिटल इमेज उपलब्ध होने और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने में अंतर है। जांच की इमेज देखने के बाद रेडियोलॉजी विशेषज्ञ द्वारा रिपोर्ट तैयार किए जाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। नई प्रणाली का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से कामकाज को आसान बनाना और संबंधित चिकित्सकों के बीच समन्वय बेहतर करना है।
मरीजों का पुराना रिकॉर्ड भी रहेगा सुरक्षित
पीएसीएस का एक प्रमुख लाभ रेडियोलॉजी इमेज और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की सुविधा है। इससे मरीज की पुरानी जांचों को जरूरत पड़ने पर दोबारा देखना आसान हो सकता है। भविष्य में उसी मरीज की दोबारा जांच होने पर पहले की इमेज से तुलना करने में भी चिकित्सकों को मदद मिल सकती है।
कई बीमारियों में मरीज की स्थिति में होने वाले बदलाव को समझने के लिए पुरानी और नई जांचों की तुलना जरूरी होती है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से चिकित्सकों को मरीज के उपचार से संबंधित जानकारी हासिल करने में सुविधा हो सकती है। इससे बार-बार पुरानी फिल्म तलाशने की परेशानी भी कम हो सकती है।
डिजिटल रिकॉर्ड के सुरक्षित रखरखाव के लिए डेटा की सुरक्षा, अधिकृत पहुंच और नियमित बैकअप जैसी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं। पीएसीएस के प्रभावी संचालन में इन पहलुओं का ध्यान रखा जाना जरूरी है, ताकि मरीजों की चिकित्सा संबंधी जानकारी सुरक्षित रहे और जरूरत के समय उपलब्ध हो सके।
फिल्म पर निर्भरता घटेगी, पर्यावरण को भी लाभ
रेडियोलॉजी जांच में डिजिटल इमेज के इस्तेमाल से एक्स-रे और सीटी स्कैन की फिल्मों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। पारंपरिक फिल्मों की छपाई और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होती है। डिजिटल प्रणाली से इमेज को कंप्यूटर पर देखा और संबंधित चिकित्सकों के साथ साझा किया जा सकता है।http://agra-up-snmc-pacs-digital-service
इससे फिल्मों के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना है। साथ ही, इमेज को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने पर मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक फिल्म पहुंचाने की जरूरत भी कम हो सकती है। यह व्यवस्था समय और संसाधनों की बचत में सहायक हो सकती है।
पीएसीएस प्रणाली अस्पताल के विभिन्न विभागों के बीच जांच संबंधी जानकारी साझा करने का माध्यम भी बनेगी। इससे रेडियोडायग्नोसिस विभाग और इलाज करने वाले चिकित्सकों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मरीजों को आधुनिक सुविधाएं देना प्राथमिकता : डॉ. प्रशांत गुप्ता
पीएसीएस सेवा का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज मरीजों को आधुनिक और पारदर्शी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पीएसीएस सेवा शुरू होने से जांच प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अस्पताल के विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा।
उन्होंने डिजिटल तकनीक के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुगम बनाने के महत्व पर जोर दिया। अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जांच और उपचार से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना जरूरी है। पीएसीएस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
रेडियोडायग्नोसिस विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी
विभागाध्यक्ष डॉ. हरि सिंह ने कहा कि पीएसीएस प्रणाली डिजिटल हेल्थकेयर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे रेडियोडायग्नोसिस विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी और मरीजों को जांच की इमेज तथा रिपोर्टिंग की प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी। डिजिटल माध्यम से इमेज उपलब्ध होने पर चिकित्सकों के लिए जांच संबंधी जानकारी हासिल करना आसान होगा।
उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में रेडियोलॉजी जांच का महत्वपूर्ण स्थान है। सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स-रे की इमेज के आधार पर कई बीमारियों की पहचान और उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलती है। ऐसे में इमेज तक जल्दी पहुंच और विभागों के बीच बेहतर समन्वय मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकता है।
उद्घाटन में ये रहे मौजूद
पीएसीएस सेवा के शुभारंभ के अवसर पर एसएन मेडिकल कॉलेज के उप प्रधानाचार्य डॉ. टीपी सिंह, प्रमुख अधीक्षक डॉ. ब्रजेश शर्मा, डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. शैलेंद्र चौधरी, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अखिल प्रताप सिंह, डॉ. निखिल शर्मा, डॉ. करिश्मा गुप्ता, डॉ. अजय श्रीवास्तव और डॉ. वीपी पांडेय मौजूद रहे। इनके अलावा रेडियोडायग्नोसिस विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में शुरू की गई इस सुविधा से जांच की इमेज के डिजिटल प्रबंधन, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और चिकित्सकों तक जानकारी पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका वास्तविक लाभ प्रणाली के नियमित संचालन, डिजिटल नेटवर्क की उपलब्धता और रिपोर्टिंग प्रक्रिया के प्रभावी समन्वय पर निर्भर करेगा।
