आगरा। हलवाई की बगीची स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। कथा की शुरुआत ‘गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो, राधा रमण हरि गोविंद बोलो’ भजन से हुई। व्यास पीठासीन आचार्य सुभाष चंद शास्त्री महाराज ने कहा कि ईश्वर सृष्टि के कण-कण में विराजमान हैं। उन्हें पाने का सबसे सरल मार्ग आत्मीयता के साथ भगवान से जुड़कर निरंतर नाम जप करना है। कथा श्रवण से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन का कल्याण होता है।
हलवाई की बगीची स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को भीष्म स्तुति, सुकदेव आगमन और हिरण्याक्ष वध प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा के दौरान भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूमते रहे। कार्यक्रम में पुरुषों की अपेक्षा महिला श्रद्धालुओं में भक्ति का उत्साह अधिक दिखाई दिया।
आचार्य सुभाष चंद शास्त्री महाराज ने कहा कि सुकदेव जी का जीवन वैराग्य, ज्ञान और निष्काम भक्ति का प्रतीक है। उनके मुख से निकली श्रीमद्भागवत कथा स्वयं भगवान का स्वरूप है। इसका श्रवण करने मात्र से जीव का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा किसी एक स्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी सृष्टि के कण-कण में उनका वास है। आवश्यकता उन्हें बाहरी साधनों में तलाशने के बजाय अपने भीतर महसूस करने की है। भगवान के नाम का निरंतर स्मरण और उनसे आत्मीय संबंध जीवन को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
कथा की शुरुआत भजन ‘गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो, राधा रमण हरि गोविंद बोलो’ से हुई। भजन के दौरान श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। कथा के प्रसंगों के साथ मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।
यजमान वंदना सक्सेना ने बताया कि कथा के तीसरे दिन सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया जाएगा। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है।
इस अवसर पर कुसुम कालरा, विभा सक्सेना, कुसुम कुलश्रेष्ठ, आवाहन श्रीवास्तव, दीपक शर्मा, देवेंद्र, सुरेंद्र, सुनील, अजय, संजय, दिनेश, शालिनी, अंजना, भव्या, ज्योति, करुणा और मिनी मौजूद रहे।

