शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीक की ट्रेनिंग
ब्लूम्स टैक्सोनॉमी से पढ़ाई का तरीका समझाया
बच्चों की समझ और सोच बढ़ाने पर जोर
आगरा। पुलिस मॉडर्न स्कूल में शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने के लिए मंगलवार को ‘लर्निंग आउटकम्स और पेडागोजी’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में शिक्षकों को प्रभावी पाठ योजना तैयार करने, छात्र-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों और ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के माध्यम से विद्यार्थियों की समझ विकसित करने के तरीके बताए गए। उद्देश्य पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ बच्चों में वैचारिक स्पष्टता, तार्किक सोच और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना रहा।

विद्यालय की प्रधानाचार्य रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में सीबीएसई की संसाधन व्यक्ति अंजली वशिष्ठ और डॉ. जगदीश शर्मा ने शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि कक्षा में केवल विषय की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि विद्यार्थी पढ़ाए गए विषय को समझें, उसके बारे में सवाल करें, तर्क के साथ अपनी बात रखें और सीखी गई जानकारी का वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल कर सकें।
कार्यशाला में सबसे पहले ‘लर्निंग आउटकम्स’ की अवधारणा पर चर्चा की गई। शिक्षकों को समझाया गया कि प्रत्येक पाठ के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि विद्यार्थी ने क्या सीखा और वह सीखी हुई जानकारी का किस तरह प्रयोग कर सकता है। इसके लिए पाठ पढ़ाने से पहले अपेक्षित सीखने के परिणाम निर्धारित करने और उसी के अनुरूप कक्षा गतिविधियां तैयार करने पर जोर दिया गया।
इसके बाद प्रभावी पाठ योजना तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई। शिक्षकों को बताया गया कि पाठ योजना ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विषय की जानकारी के साथ विद्यार्थियों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो। सवाल-जवाब, समूह गतिविधियों, उदाहरणों और समस्या समाधान जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जा सकता है।
प्रशिक्षकों ने छात्र-केंद्रित शिक्षण रणनीतियों पर भी विस्तार से जानकारी दी। इसमें शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को स्वयं सोचने, चर्चा करने और निष्कर्ष तक पहुंचने के अवसर देने पर जोर दिया गया। इससे कक्षा में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने और उनकी समझ को बेहतर तरीके से परखने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला में ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के विभिन्न स्तरों का भी प्रशिक्षण दिया गया। शिक्षकों को बताया गया कि बच्चों से केवल तथ्यों को याद कराने के बजाय उन्हें समझने, लागू करने, विश्लेषण करने, मूल्यांकन करने और नई अवधारणाएं तैयार करने के अवसर दिए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों में रटने के बजाय विषय को गहराई से समझने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल निर्धारित पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में वैचारिक स्पष्टता, तार्किक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को इसी दिशा में अपनी कक्षा शिक्षण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के तरीके बताए गए।

