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Agra News: भारत अब सहन नहीं करता, जवाब देता है, ऑपरेशन सिंदूर के बाद नया संदेश “अब और नहीं पाकिस्तान”: आगरा क्लब संगोष्ठी में हुआ मंथन

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आगरा।आगरा क्लब में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (FANS) के आगरा चैप्टर द्वारा “अब और नहीं पाकिस्तान (No More Pakistan)” विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रविवार को कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी ने किया। संगोष्ठी में पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य वर्चस्व, आर्थिक बदहाली, अलगाववादी आंदोलनों, सीमा पार आतंकवाद और भारत की बदली हुई रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बने नए सुरक्षा परिदृश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने आंतरिक विरोधाभासों और विफल नीतियों के कारण गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।

No More Pakistan seminar held at Agra Club by FANS
कार्यक्रम में बोलते वक्ता, मंचासीन हैं विशिष्ट अतिथि। स्रोत संस्था

मुख्य अतिथि गोलोक बिहारी ने कहा कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या उसका सैन्य वर्चस्व है, जिसने राजनीति, न्यायपालिका और शासन व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण बना रखा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चार बार सैन्य शासन और तीन बार संविधान के निलंबन का सामना कर चुका है। पाकिस्तान की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हुए उन्होंने कराची की एक चर्चित दीवार लेखनी का उल्लेख किया, जिसमें लोकतंत्र को अस्थायी व्यवस्था बताया गया था। उन्होंने कहा कि गंभीर आर्थिक संकट और आंतरिक अराजकता से जूझ रहे पाकिस्तान द्वारा पहलगाम हमले में शामिल होना एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुई। भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य क्षमता को कम आंकने का परिणाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में सामने आया, जिसने पाकिस्तान की नीति और सोच को बदलने पर मजबूर किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की भौगोलिक संरचना विविध होने के बावजूद खराब शासन, भ्रष्टाचार और सेना के प्रभुत्व के कारण देश एकजुट नहीं रह पाया है। उन्होंने बताया कि पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और सरकार, सेना व न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर होता जा रहा है।

मुख्य वक्ता ब्रिगेडियर मनोज कुमार ने कहा कि पाकिस्तान में अलगाववादी आंदोलनों ने तीव्र रूप ले लिया है। बलूचिस्तान को बलपूर्वक पाकिस्तान में शामिल किया गया और वहां के लोग लंबे समय से उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा, विशेषकर पश्चिमी सीमा पर, और अधिक कमजोर हुई है। टीटीपी और बीएलए जैसे संगठनों की बढ़ती गतिविधियां पाकिस्तान के संभावित विघटन की ओर संकेत करती हैं।

राष्ट्रीय मंत्री प्रोफेसर डॉ. रजनीश त्यागी ने कहा कि भारी मुद्रास्फीति, बेरोजगारी, भोजन और दवाओं की कमी तथा सरकार पर बढ़ता अविश्वास पाकिस्तान विरोधी आंदोलनों का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार बेलआउट पर निर्भर हो चुकी है, जो उसके भविष्य के लिए घातक है।

राजनीतिक विश्लेषक गौरी शंकर सिकरवार ने कहा कि पाकिस्तान में सुन्नी-शिया विभाजन और जातीय असमानताएं इतनी गहरी हैं कि वहां स्थायी स्थिरता की संभावना क्षीण है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगियों का भरोसा टूटना भी पाकिस्तान को कमजोर कर रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्क्वाड्रन लीडर ए.के. सिंह ने की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता, नागरिक संस्थानों का पतन और वैचारिक संकट पाकिस्तान को टूटने के कगार पर ले आए हैं।

संगोष्ठी का संचालन महामंत्री डॉ दिवाकर तिवारी ने किया। कार्यक्रम में पूर्व सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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