आगरा। आंगनवाड़ी भर्ती में कम आय दर्शाकर गलत आय प्रमाण पत्र बनवाने और उनके आधार पर नियुक्ति पाने वालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच में अपात्र पाए गए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां निरस्त करने और गलत प्रमाण पत्र जारी करने वाले लेखपालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीपीएल श्रेणी में नहीं आने और निर्धारित मानक से अधिक वास्तविक आय होने के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने ऐसे प्रमाण पत्रों को भी निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जनपद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया के दौरान कम आय दर्शाकर प्रमाण पत्र बनवाने और उनके आधार पर नियुक्ति हासिल करने की शिकायतें जिलाधिकारी के पास पहुंची थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कुछ अभ्यर्थियों ने वास्तविक आय से कम आय दर्शाकर प्रमाण पत्र बनवाए, जबकि वे निर्धारित पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते थे। जिलाधिकारी ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को आय प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने और पूरे मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए थे।
प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में घोषित आय और संबंधित अभ्यर्थियों की वास्तविक आय के बीच अंतर के मामले सामने आए हैं। जांच में ऐसे आवेदनकर्ताओं के मामले भी प्रकाश में आए, जो बीपीएल श्रेणी में नहीं आते थे और जिनकी वास्तविक आय प्रमाण पत्र में दर्शाई गई आय से अधिक थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जांच में अपात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियां निरस्त की जाएं। गलत तथ्यों के आधार पर जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों को भी रद्द किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित न हों।
इस मामले में तहसील स्तर पर प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान लेखपालों की भूमिका भी सामने आई है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जिन लेखपालों ने मौके पर सही सत्यापन किए बिना गलत रिपोर्ट लगाई और उसके आधार पर आय प्रमाण पत्र जारी कराने की संस्तुति की, उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए। प्रशासन यह भी जांच करेगा कि संबंधित लेखपालों ने वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाए बिना किस आधार पर कम आय की रिपोर्ट लगाई थी।
ऐसा ही एक मामला तहसील एत्मादपुर के ग्राम उजरई जाट का सामने आया है। यहां रहने वाली गौरी पत्नी लोकेंद्र कुमार ने जनता दर्शन में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि गांव में आंगनवाड़ी के दो रिक्त पदों पर हुई भर्ती में त्रुटिपूर्ण आय प्रमाण पत्रों के आधार पर अपात्र अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। शिकायतकर्ता ने भर्ती में पात्रता और आय संबंधी नियमों के पालन पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच कराने की मांग की थी।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए एसडीएम को पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कराने के निर्देश दिए। इसके बाद तहसीलदार एत्मादपुर की ओर से मामले की जांच की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित लेखपालों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सही ढंग से जांच नहीं की थी। इसके बावजूद त्रुटिपूर्ण आय प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस तरह की लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित लेखपालों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि गलत तरीके से जारी किए गए आय प्रमाण पत्रों को निरस्त किया जाए। साथ ही जिन लेखपालों ने प्रमाण पत्र जारी करने के लिए गलत रिपोर्ट लगाई या बिना समुचित सत्यापन के संस्तुति की, उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए। गलत आय प्रमाण पत्रों के आधार पर हुई नियुक्तियों को भी निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि भर्ती में पात्रता की शर्तों का पालन अनिवार्य है और गलत जानकारी देकर नियुक्ति प्राप्त करने वालों को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही और गलत तथ्यों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आय प्रमाण पत्र किसी भी अभ्यर्थी की पात्रता निर्धारित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में इसे जारी करने से पहले संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह दिए गए विवरण का सही तरीके से सत्यापन करें। बिना जांच किए गलत रिपोर्ट लगाने से न केवल सरकारी प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि वास्तविक पात्र लोगों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।
प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्धारित नियमों के अनुरूप बनाए रखने के लिए शिकायतों की जांच जारी रहेगी। जांच में जिन अभ्यर्थियों की पात्रता गलत पाई जाएगी, उनकी नियुक्तियां निरस्त की जाएंगी। वहीं, गलत आय प्रमाण पत्र जारी कराने में भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता के तौर पर न किया जाए, बल्कि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति का मिलान कर जिम्मेदारी तय की जाए।
