आगरा। यमुना मैया को चुनरी अर्पित कर श्रीकृष्ण लीला महोत्सव का शंखनाद किया जाएगा। 25 अक्टूबर को बल्केश्वर स्थित गणेश राम नागर स्कूल से पार्वती घाट तक चुनरी मनोरथ यात्रा निकाली जाएगी। यहां विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद नाव के माध्यम से यमुना मैया को चुनरी अर्पित की जाएगी।
दुग्धाभिषेक और दीपदान के साथ यमुना मैया की आराधना होगी। 13 नवंबर से शुरू होने वाले श्रीकृष्ण लीला महोत्सव से पहले आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालु सुख-समृद्धि, परिवार की मंगलकामना और महोत्सव के निर्विघ्न आयोजन की प्रार्थना करेंगे। यात्रा में बैंड-बाजे और ढोल के साथ श्रद्धालु शामिल होंगे। मार्ग में पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया जाएगा।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-yamuna-maiya-chunri-shri-krishna-leela-mahotsav-start/
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के शुभारंभ से पहले यमुना मैया के चुनरी मनोरथ उत्सव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी सिलसिले में वाटर वर्क्स स्थित अतिथि वन में श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने की। उन्होंने सदस्यों को कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन से जुड़ी जानकारी दी। बैठक में चुनरी मनोरथ यात्रा को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित करने और श्रद्धालुओं की सहभागिता को लेकर चर्चा की गई।
मनीष अग्रवाल ने बताया कि यमुना मैया का चुनरी मनोरथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह उनके प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है। सनातन परंपरा में मां यमुना को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय और ब्रज संस्कृति की जीवनधारा माना गया है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु यमुना मैया को चुनरी अर्पित कर उनकी आराधना करेंगे। इसके साथ ही सुख-समृद्धि, परिवार की मंगलकामना और श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के निर्विघ्न आयोजन की प्रार्थना की जाएगी।
उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण लीला महोत्सव से पहले चुनरी मनोरथ का आयोजन श्रद्धालुओं को ब्रज की भक्ति परंपरा से जोड़ने का अवसर भी है। यमुना मैया के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में पूजन-अर्चन, दुग्धाभिषेक और दीपदान की परंपराएं निभाई जाएंगी। आयोजन के माध्यम से महोत्सव की शुरुआत से पहले धार्मिक वातावरण तैयार होगा। श्रद्धालु यमुना मैया को चुनरी अर्पित कर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी ब्रज संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करेंगे।
दोपहर तीन बजे बल्केश्वर से निकलेगी यात्रा
चुनरी मनोरथ यात्रा रविवार, 25 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे बल्केश्वर स्थित गणेश राम नागर स्कूल से शुरू होगी। यात्रा में बैंड-बाजे और ढोल के साथ श्रद्धालु शामिल होंगे। यहां से यात्रा पार्वती घाट पहुंचेगी। यात्रा के मार्ग में श्रद्धालु पुष्प वर्षा कर स्वागत करेंगे। आयोजन में धार्मिक उल्लास के साथ श्रद्धालु यमुना मैया के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करेंगे। समिति की ओर से कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर बैठक में जानकारी साझा की गई।
पार्वती घाट पहुंचने के बाद यमुना मैया का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। इसके बाद नाव के माध्यम से यमुना मैया को चुनरी अर्पित की जाएगी। चुनरी मनोरथ की इस परंपरा में श्रद्धालु मां यमुना को चुनरी भेंट कर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करेंगे। साथ ही श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के सफल और निर्विघ्न आयोजन के लिए प्रार्थना की जाएगी। घाट पर धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालु पूजन-अर्चन में भाग लेंगे।
दुग्धाभिषेक और दीपदान से होगी आराधना
महंत अनंत उपाध्याय, पंडित मुकेश शर्मा और पंकज शास्त्री के मार्गदर्शन में यमुना मैया का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। इस दौरान दुग्ध की धार अर्पित कर दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही यमुना घाट पर दीपदान होगा। श्रद्धालु धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां यमुना की आराधना करेंगे। आयोजन में चुनरी अर्पित करने के साथ दुग्धाभिषेक और दीपदान को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है।http://agra-up-yamuna-chunri-manorath-krishna-leela-mahotsav
समिति अध्यक्ष मनीष अग्रवाल के अनुसार, चुनरी मनोरथ उत्सव में श्रद्धालु यमुना मैया के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण प्रकट करेंगे। सनातन परंपरा में यमुना मैया का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण और ब्रज संस्कृति से जुड़ी मान्यताओं के कारण यमुना की आराधना का विशेष स्थान है। इसी भाव के साथ आयोजित होने वाले चुनरी मनोरथ में श्रद्धालु परिवार की मंगलकामना के साथ श्रीकृष्ण लीला महोत्सव की सफलता के लिए प्रार्थना करेंगे।
पीले-लाल वस्त्रों में शामिल होंगे समिति के सदस्य
चुनरी मनोरथ उत्सव में समिति के सदस्य पीले और लाल वस्त्र पहनकर शामिल होंगे। वहीं, महिलाएं चुनरी की साड़ी पहनकर आयोजन में सहभागिता करेंगी। पारंपरिक वस्त्रों में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक आयोजन की परंपरा को निभाएंगे। बल्केश्वर से पार्वती घाट तक निकलने वाली यात्रा के बाद घाट पर पूजन, चुनरी अर्पण, दुग्धाभिषेक और दीपदान के कार्यक्रम होंगे।
श्रीकृष्ण लीला महोत्सव का आयोजन 13 नवंबर से शुरू होना है। इससे पहले 25 अक्टूबर को होने वाला चुनरी मनोरथ उत्सव महोत्सव की धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत करेगा। समिति की बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा साझा करते हुए आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। समिति का उद्देश्य यमुना मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ श्रद्धालुओं को ब्रज की भक्ति परंपरा से जोड़ना है।
बैठक में ये रहे उपस्थित
वाटर वर्क्स स्थित अतिथि वन में आयोजित बैठक में राजीव अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, कैलाश चंद्र अग्रवाल, मनोज गोयल, शेखर गोयल, शंभू खंडेलवाल, विनीत सिंघल, पंडित मुकेश शर्मा, पंकज शास्त्री, मनोज गुप्ता, वीरेंद्र गोयल, जवाहरलाल सिंघल, अनूप गोयल, विष्णु अग्रवाल, संजय गर्ग, सतीश गौड़, अनंत उपाध्याय, अशोक कुमार गोयल, आदर्श नंदन गुप्त, लक्ष्मण शर्मा, विजय रोहतगी, हर्ष दत्त शर्मा, रमेश कुमार गुप्ता और गिर्राज बंसल आदि उपस्थित रहे।
