बीवी एंटरप्राइजेज के परिसर में चल रहा था संदिग्ध टेलीकॉम सेटअप, दो आरोपी गिरफ्तार; लोन रिकवरी के नाम पर धमकी और साइबर फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जांच में जुटी पुलिस
आगरा। लोन रिकवरी के नाम पर लोगों को धमकाने और साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों की जांच के बीच आगरा पुलिस ने एक संदिग्ध सिम बॉक्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। साइबर क्राइम पुलिस, एसओजी, सर्विलांस टीम और दूरसंचार विभाग की संयुक्त टीम ने बीवी एंटरप्राइजेज के परिसर में छापेमारी कर दो आरोपियों आमिर सैफी और मनीष को गिरफ्तार किया। मौके से आठ सिम बॉक्स, 221 सिम कार्ड, 96 रेडियो एंटीना, पांच लैपटॉप, एक डेल सर्वर और अन्य नेटवर्किंग उपकरण बरामद किए गए हैं।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-sim-box-network-221-sim-cards-96-radio-antennas/
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिसर में संदिग्ध टेलीकॉम गतिविधियों से जुड़ा सेटअप संचालित किया जा रहा था। जांच के दौरान लोन रिकवरी के नाम पर लोगों को धमकाने और साइबर फ्रॉड से जुड़े पहलुओं के बारे में भी जानकारी मिली है। हालांकि, इन गतिविधियों में बरामद उपकरणों और गिरफ्तार आरोपियों की वास्तविक भूमिका का पता तकनीकी जांच और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क को किस उद्देश्य से संचालित किया जा रहा था, सिम कार्ड कहां से जुटाए गए और इसके जरिए किन लोगों से संपर्क किया जाता था। साथ ही, नेटवर्क के पीछे अन्य लोगों की भूमिका और दूसरे जनपद में कथित तौर पर संचालित एक अन्य कार्यालय के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
31 संदिग्ध मोबाइल नंबरों से मिला नेटवर्क का सुराग
पुलिस को जांच के दौरान 31 संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जुड़े इनपुट मिले थे। इन नंबरों की गतिविधियों और तकनीकी जानकारियों की पड़ताल की गई तो एक संदिग्ध सिम बॉक्स नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आई। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस, एसओजी, सर्विलांस टीम और दूरसंचार विभाग ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई।
टीम ने बीवी एंटरप्राइजेज के परिसर में छापेमारी कर वहां मौजूद उपकरणों और सिम कार्डों की जांच की। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में सिम कार्ड और नेटवर्किंग उपकरण मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
पुलिस अब 31 संदिग्ध मोबाइल नंबरों और बरामद सिम कार्डों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन नंबरों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और क्या इनका संबंध लोगों को धमकाने या साइबर ठगी से जुड़े मामलों से है। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड, उपकरणों में मौजूद डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
एक सिम बॉक्स में 32 सिम लगाने की व्यवस्था
छापेमारी के दौरान पुलिस को आठ सिम बॉक्स मिले हैं। जांच में सामने आया कि एक सिम बॉक्स में 32 सिम लगाने के स्लॉट थे। इस तरह के उपकरणों में एक साथ कई मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनकी मदद से बड़ी संख्या में सिम को एक ही सेटअप से जोड़कर कॉलिंग और दूसरी दूरसंचार गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं।
हालांकि, केवल सिम बॉक्स और बड़ी संख्या में सिम कार्ड मिलना अपने आप में किसी खास अपराध को साबित नहीं करता। इस मामले में पुलिस यह पता लगा रही है कि बरामद उपकरणों का वास्तविक इस्तेमाल क्या था, उन्हें किस तरह कॉन्फिगर किया गया था और उनसे किन नंबरों पर संपर्क किया जा रहा था।
मौके से बरामद 221 सिम कार्डों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह जानकारी जुटाएगी कि ये सिम किन लोगों के नाम पर जारी हुए थे, इन्हें कहां से प्राप्त किया गया और इनकी सक्रियता का रिकॉर्ड क्या है। सिम कार्डों की पहचान और तकनीकी विवरण के आधार पर नेटवर्क के संचालन से जुड़े लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
पांच लैपटॉप, डेल सर्वर और नेटवर्किंग उपकरण जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान पांच लैपटॉप, एक डेल सर्वर और कई अन्य नेटवर्किंग उपकरण भी जब्त किए हैं। इन उपकरणों में मौजूद डिजिटल डेटा इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। पुलिस इनके जरिए नेटवर्क के संचालन, सिम कार्डों के इस्तेमाल और संदिग्ध नंबरों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।http://agra-up-cyber-crime-sim-box-network-bust
लैपटॉप और सर्वर में उपलब्ध रिकॉर्ड की तकनीकी जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सेटअप कब से संचालित हो रहा था, इसे चलाने के लिए किन उपकरणों और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था और इससे जुड़े अन्य लोगों के साथ किस तरह संपर्क किया जाता था। जांच एजेंसियां बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाले साक्ष्यों का संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जानकारी से मिलान करेंगी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क से संबंधित डेटा किसी अन्य स्थान पर भी रखा गया था या नहीं। उपकरणों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले में नेटवर्क के संचालन और उसकी गतिविधियों की अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
लोन रिकवरी के नाम पर धमकाने के पहलू की जांच
इस मामले में पुलिस की जांच केवल संदिग्ध टेलीकॉम सेटअप तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच में लोन रिकवरी के नाम पर लोगों को धमकाने और साइबर फ्रॉड से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन तथ्यों की अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बरामद उपकरणों का कथित धमकी और साइबर ठगी के मामलों से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संदिग्ध नंबरों के जरिए लोगों से किस तरह संपर्क किया जाता था। क्या इन कॉल का इस्तेमाल कर्ज की वसूली के लिए दबाव बनाने, धमकी देने या किसी अन्य साइबर गतिविधि में किया जा रहा था, इसकी पुष्टि तकनीकी साक्ष्यों और संबंधित शिकायतों के मिलान से की जाएगी।
पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि यदि किसी व्यक्ति को धमकी दी गई या उसके साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है, तो उस घटना और बरामद नेटवर्क के बीच संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जाएं। फिलहाल इन पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया है। जांच पूरी होने से पहले किसी एक गतिविधि को बरामद नेटवर्क से निश्चित रूप से जुड़ा हुआ मानना उचित नहीं होगा।
दूसरे जनपद में भी कार्यालय होने की सूचना
पुलिस की जांच में नेटवर्क से जुड़े एक अन्य कार्यालय के किसी दूसरे जनपद में संचालित होने की सूचना भी सामने आई है। इस जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित कार्यालय का बीवी एंटरप्राइजेज के परिसर में मिले सेटअप से क्या संबंध है और क्या दोनों जगहों पर एक ही नेटवर्क के तहत गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
यदि दूसरे कार्यालय का संबंध इस मामले से मिलता है तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। इसके तहत वहां इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों, सिम कार्डों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, दूसरे कार्यालय की भूमिका और वहां किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि अभी जांच का विषय है।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि सेटअप किसके निर्देश पर चल रहा था, उपकरण कहां से खरीदे या जुटाए गए और सिम कार्डों की व्यवस्था कौन करता था। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क के संचालन में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
बीवी एंटरप्राइजेज परिसर से बरामद आठ सिम बॉक्स, 221 सिम कार्ड, 96 रेडियो एंटीना, पांच लैपटॉप, एक डेल सर्वर और अन्य नेटवर्किंग उपकरण अब पुलिस की जांच का हिस्सा हैं। इनसे मिलने वाले डेटा और तकनीकी जानकारियों के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की गतिविधियों का मिलान किया जाएगा।
साइबर क्राइम पुलिस, एसओजी, सर्विलांस टीम और दूरसंचार विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य फोकस नेटवर्क के वास्तविक इस्तेमाल, उसके संचालन से जुड़े लोगों और लोन रिकवरी के नाम पर धमकी तथा साइबर फ्रॉड से संभावित संबंधों पर है। पुलिस दूसरे जनपद में कथित कार्यालय की सूचना का सत्यापन भी कर रही है।
फिलहाल दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में नेटवर्क के पीछे सक्रिय अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद ही पूरे प्रकरण की तस्वीर सामने आ सकेगी।
