आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर स्थित श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में मंगलवार को मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध और रावण वध का मंचन किया गया। राम-रावण की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध और प्रभु श्रीराम के हाथों दशानन के अंत का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। श्री महंत योगेश पुरी ने लोगों से पुतले के साथ अपने भीतर की बुराइयों को भी समाप्त करने का आह्वान किया। बुधवार को महोत्सव में प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का आयोजन होगा।
“बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा॥” देवताओं की ओर से पुष्प वर्षा और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच दशानन के धराशायी होते ही रामलीला मैदान भक्तिमय हो उठा। श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान की ओर से गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर आयोजित श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में मंगलवार को राम-रावण युद्ध के साथ मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध और रावण वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। रणभूमि में दोनों सेनाओं के बीच संघर्ष, योद्धाओं का पराक्रम और अंत में प्रभु श्रीराम की विजय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-up-meghnad-kumbhakarna-ravan-vadh-ramlila-jai-shri-ram/

रामलीला के दौरान युद्ध के प्रसंगों को देखकर श्रद्धालु लगातार जय श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। मेघनाद और कुंभकर्ण के वध के बाद रावण का युद्धभूमि में उतरना और फिर श्रीराम के हाथों उसका अंत होने के दृश्य ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इन प्रसंगों के माध्यम से अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अहंकार पर मर्यादा की विजय का संदेश दिया गया।
लक्ष्मण के बाण से धराशायी हुआ मेघनाद
राम-रावण युद्ध के दौरान रावण के पुत्र मेघनाद ने अपनी मायावी शक्तियों के बल पर श्रीराम की सेना को चुनौती दी। उसकी रणनीति और युद्ध कौशल के कारण रणभूमि में संघर्ष तेज हो गया। दोनों पक्षों के योद्धा एक-दूसरे का सामना करते रहे। वानर सेना और राक्षसों के बीच युद्ध के दौरान कई रोमांचकारी दृश्य सामने आए।
अंत में लक्ष्मण ने पराक्रम दिखाते हुए मेघनाद का वध कर दिया। मेघनाद के धराशायी होते ही वानर सेना में उत्साह छा गया। श्रीराम की सेना के जयकारों से मैदान गूंज उठा। रामलीला में इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शक युद्ध के दृश्य को एकाग्रता से देखते रहे।http://agra-up-meghnad-kumbhakarna-vadh-shri-ram-ravan-ant
कुंभकर्ण के वध से बदली युद्ध की दिशा
मेघनाद की मृत्यु का समाचार रावण तक पहुंचा तो उसने अपने महाबली भाई कुंभकर्ण को युद्धभूमि में भेजा। विशालकाय कुंभकर्ण के रणभूमि में उतरते ही युद्ध ने नया मोड़ ले लिया। उसने वानर सेना पर प्रहार किए, जिससे सेना में खलबली मच गई। उसके विशाल शरीर और युद्ध के दृश्यों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कुंभकर्ण के हमलों के बावजूद श्रीराम की सेना ने मुकाबला जारी रखा। अंततः प्रभु श्रीराम ने अपने बाणों से कुंभकर्ण का अंत कर दिया। उसके धराशायी होते ही युद्धभूमि में श्रीराम की सेना का उत्साह बढ़ गया। इस प्रसंग ने दर्शकों को रोमांचित किया और मैदान में जय श्रीराम के उद्घोष सुनाई देते रहे।
श्रीराम के दिव्य बाण से हुआ दशानन का अंत
मेघनाद और कुंभकर्ण के वध के बाद रावण स्वयं युद्धभूमि में उतरा। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ। दोनों ओर से बाणों की वर्षा हुई और रणभूमि युद्ध के दृश्यों से गूंजती रही। रामलीला में दोनों योद्धाओं के बीच हुए संघर्ष का मंचन देखने के लिए श्रद्धालु जुटे रहे।

युद्ध के अंत में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने दिव्य बाण से रावण का वध कर दिया। दशानन के धराशायी होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। देवताओं की ओर से पुष्प वर्षा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। रावण वध के साथ ही अधर्म, अहंकार और अन्याय के अंत तथा धर्म और सत्य की विजय का संदेश सामने आया।
रावण वध के दृश्य के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाकर विजय का उल्लास प्रकट किया। रामलीला में उपस्थित लोगों के लिए यह प्रसंग केवल युद्ध का दृश्य नहीं, बल्कि मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख भी रहा। मंचन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा।
अपने भीतर की बुराइयों को भी त्यागें
महंत योगेश पुरी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि लोग केवल रावण के पुतले का दहन करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों का भी त्याग करें। उन्होंने परिवार में संस्कार, समाज में सद्भाव और जीवन में मर्यादा अपनाने पर बल दिया। उनके अनुसार, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारकर ही जीवन को सही दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि रामलीला के प्रसंग लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। रावण वध का प्रसंग अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।
बुधवार को होगा श्रीराम का राज्याभिषेक
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि बुधवार को श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव के अंतर्गत प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य आयोजन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से समारोह में पहुंचकर प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया।
राज्याभिषेक के आयोजन के साथ रामलीला महोत्सव का अगला प्रमुख प्रसंग प्रस्तुत किया जाएगा। मंगलवार को मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण वध के मंचन के दौरान मैदान में गूंजते जयकारों के बीच धर्म की विजय का संदेश दिया गया। बुधवार को होने वाले राज्याभिषेक समारोह को लेकर श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है।
