रामलीला मैदान में राम-कुंभकर्ण के बीच हुआ घमासान युद्ध, तीरों की बौछार के बीच तीर लूटने दौड़े दर्शक
तोप के गोलों के धमाकों और आतिशबाजी के बीच जला 40 फुट ऊंचा कुंभकर्ण का पुतला, सोमवार को होगा मेघनाद वध
आगरा। छाड़ि कपट निज रूप बहोरी। सोइ रावनु कपट बल जोरी॥ श्री रामलीला के युद्ध प्रसंगों के बीच रविवार को आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में प्रभु श्रीराम और कुंभकर्ण के बीच भीषण युद्ध का सजीव मंचन किया गया।
स्वरूपों की आरती हेल्प आगरा अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, गौतम सेठ, शांति स्वरूप गोयल, राज किशोर खंडेलवाल, अनिल वर्मा, नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, अपना घर अन्नपूर्णा महिला आश्रम के सदस्यों द्वारा की गई। रणभूमि में दोनों ओर से तीरों की बौछार हुई तो कभी तलवार, गदा और भालों से प्रहार किए गए।

दर्शकों की निगाहें कभी युद्ध करते स्वरूपों पर टिकतीं तो कभी मैदान में लगी एलईडी स्क्रीन पर। युद्ध के रोमांच के बीच प्रभु श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। अंत में प्रभु श्रीराम के अमोघ अस्त्र से कुंभकर्ण का वध हुआ और तोप के गोलों के धमाकों के बीच उसके लगभग 40 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया गया।https://todaynewstrack.com/2026/10/agra-ramlila-mahotsav-2026-kumbhkaran-vadh-up-news/
रामलीला मैदान में रविवार की लीला का आरंभ लक्ष्मण जी के मूर्छा से जागने के प्रसंग से हुआ। रामसेना के पराक्रम से चिंतित रावण ने युद्ध में अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कुंभकर्ण को जगाने का निर्णय लिया। छह माह तक निद्रा में रहने वाले कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण स्वयं उसके महल पहुंचा। काफी प्रयासों के बाद कुंभकर्ण की निद्रा टूटी तो वह मदमस्त हाथी की भांति युद्धभूमि की ओर चल पड़ा। विशालकाय कुंभकर्ण को रणभूमि में उतरते देख युद्ध का रोमांच और बढ़ गया।
रणभूमि में आमने-सामने आए राम और कुंभकर्ण
मंचीय लीला के बाद जैसे ही प्रभु श्रीराम और कुंभकर्ण की सेनाएं मैदान में उतरीं, युद्ध का दृश्य जीवंत हो उठा। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की ओर से शत्रु सेना पर तीरों की बौछार होने लगी। जवाब में कुंभकर्ण की सेना ने भी मोर्चा संभालते हुए प्रहार किए। तलवार, गदा और भालों से सैनिक एक-दूसरे पर वार करने लगे।
दोनों रथों पर सवार स्वरूपों के बीच युद्ध देखने के लिए दर्शक उत्साहित नजर आए। तीरों की बौछार के दौरान मैदान में गिरे तीरों को उठाने के लिए दर्शक रथों के आगे-पीछे दौड़ते रहे। सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए व्यवस्था संभाली।

कुंभकर्ण पर प्रभु श्रीराम के लगातार प्रहार होते रहे, लेकिन उसका विशाल शरीर और युद्ध कौशल चुनौती बना रहा। रणभूमि में दोनों ओर से घमासान जारी रहा। अंततः प्रभु श्रीराम ने अमोघ अस्त्र का संधान किया। अस्त्र लगते ही कुंभकर्ण का शीश धड़ से अलग होकर धरती पर जा गिरा। कुंभकर्ण के वध के साथ ही मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। प्रभु श्रीराम ने कुंभकर्ण का उद्धार कर उसे श्रीधाम पहुंचाया।
तोप के गोलों से दहला रामलीला मैदान, जला 40 फुट ऊंचा पुतला
कुंभकर्ण के वध के साथ ही मैदान में आतिशबाजी शुरू हो गई। तोप के गोलों के धमाकों से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा। इसके बाद कुंभकर्ण के लगभग 40 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया गया। पुतला धू-धू कर जलने लगा तो दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। पुतला दहन से पहले भी मैदान में आतिशबाजी की गई, जिसने आयोजन के रोमांच को और बढ़ा दिया।
रामलीला कमेटी के पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, टीएन अग्रवाल, भगवानदास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, मनोज (पोली), विष्णु दयाल बंसल, संजय तिवारी, महेश चंद, राकेश जैन, संजय अग्रवाल, रामाशीष शर्मा, रामांशु शर्मा, विजय प्रकाश गोयल, अजय अग्रवाल, दिलीप कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष तार, राहुल शर्मा, राहुल गौतम आदि उपस्थित रहे।
इन्होंने संभाला युद्ध संचालन
रामलीला मैदान में युद्ध के दृश्यों का संचालन मुकेश जौहरी, प्रवीण स्वरूप, प्रकाशचंद, आनंद मंगल और अंजुल बंसल ने किया।
आज होगा मेघनाद वध, 90 फुट लंबे पुतले का दहन
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि मेघनाद वध के उपलक्ष्य में सोमवार को विशेष आतिशबाजी का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें प्रमुख आतिशबाज अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि सोमवार, 19 अक्टूबर को शाम सात बजे से मेघनाद वध की लीला का मंचन होगा। इसके बाद मेघनाद के लगभग 90 फुट लंबे पुतले का दहन किया जाएगा।
