नदी में सालभर पानी का बहाव बनाए रखने
गंदे नालों का पानी अलग नहर में भेजने और किनारों को अतिक्रमण व प्रदूषण से बचाने के लिए उठाई आवाज
आगरा। यमुना की बदहाली दूर करने और आगरा में जल संकट से निपटने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। रिवर कनेक्ट अभियान के स्वयंसेवकों ने रविवार शाम यमुना आरती स्थल पर बैठक कर ताजमहल से नीचे की ओर नदी पर बांध बनाने, नदी तल में जमा मिट्टी और कचरा हटाने तथा सालभर पानी का बहाव बनाए रखने की मांग उठाई।Agra: Yamuna Pollution and Dirty Drains
बैठक में नालों का गंदा पानी नदी में गिरने से रोककर अलग नहर में भेजने, दोनों किनारों पर पक्के तटबंध बनाने और नदी के आसपास बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने के सुझाव दिए गए। नदी को प्रदूषित करने वालों पर लगातार निगरानी रखने, नदी किनारे मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगाने
और यमुना किनारा रोड से परिवहन कंपनियों को दूसरी जगह भेजने की मांग भी की गई। स्वयंसेवकों ने कहा कि यमुना को बचाने के लिए नदी में पानी की उपलब्धता, सफाई, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी पर एक साथ काम करना जरूरी है।

ताजमहल से आगे बांध बनाने की मांग
बैठक में मांग की गई कि ताजमहल से नीचे की ओर यमुना पर बांध बनाने की योजना पर जल्द अमल किया जाए। स्वयंसेवकों का कहना था कि इससे नदी में पानी जमा करने में मदद मिल सकती है और आगरा में जल संकट से निपटने का रास्ता निकल सकता है। नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए इस योजना को प्राथमिकता देने की मांग की गई।
नदी तल में जमा मिट्टी और सिल्ट को निकालने का प्रस्ताव भी रखा गया। स्वयंसेवकों के अनुसार, नदी के तल की सफाई से पानी जमा रखने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही जमीन में पानी पहुंचने की प्रक्रिया में बाधा डालने वाली परतों को हटाने की जरूरत बताई गई। उनका कहना था कि यमुना की सफाई के लिए ऐसी योजना बनाई जाए, जिससे नदी में पानी का बहाव और भूजल स्तर सुधारने के प्रयासों को लाभ मिले।Agra: Yamuna River Crisis and Demand for a Barrage
सालभर नदी में पानी रहना जरूरी
बैठक में यमुना में सालभर न्यूनतम पानी का बहाव बनाए रखने की मांग की गई। स्वयंसेवकों ने कहा कि नदी में पर्याप्त पानी नहीं रहने से जलीय जीवों, प्राकृतिक वातावरण और आसपास के भूजल पर असर पड़ता है। यमुना को जीवंत बनाए रखने के लिए पूरे साल पानी का न्यूनतम बहाव सुनिश्चित करना जरूरी है।

पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने नदी में गिरने वाले नालों के गंदे पानी को रोककर यमुना के समानांतर बनाई जाने वाली नहर में मोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि नालों का पानी सीधे नदी में जाने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। बैठक में नदी के दोनों किनारों पर पक्के तटबंध बनाने की मांग भी उठी।
नदी किनारे विकास में पर्यावरण का ध्यान रखने पर जोर
स्वयंसेवकों ने यमुना किनारे सुनियोजित विकास की जरूरत बताई। उनका कहना था कि नदी के आसपास विकास का उद्देश्य केवल सुंदरता बढ़ाना नहीं होना चाहिए। इससे नदी की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लाभ मिलना चाहिए। साथ ही नागरिकों के लिए ऐसे सार्वजनिक स्थान विकसित किए जाने चाहिए, जहां लोग सुरक्षित रूप से आ-जा सकें और नदी से जुड़ सकें।

बैठक में कहा गया कि नदी किनारे किसी भी तरह का विकास करते समय पर्यावरण और यमुना की प्राकृतिक स्थिति का ध्यान रखा जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को मिलकर योजना तैयार करनी चाहिए, ताकि नदी की सुरक्षा और लोगों की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ेंगे लोग
जगन प्रसाद तेहरिया ने यमुना किनारे सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना था कि नियमित सांस्कृतिक आयोजन और धार्मिक कार्यक्रम होने से स्थानीय लोगों का नदी से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। जब लोग यमुना को अपनी साझा धरोहर मानेंगे, तो उसकी सुरक्षा के लिए भी आगे आएंगे।
बैठक में कहा गया कि नदी को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं है। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। नदी किनारे होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को यमुना के महत्व और उसके संरक्षण से जोड़ा जा सकता है। स्वयंसेवकों ने कहा कि जनभागीदारी से ही नदी की रक्षा के लिए स्थायी जनआंदोलन खड़ा हो सकेगा।
प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार नजर रखने की मांग
शहतोश गौतम ने यमुना को प्रदूषित करने वाली गतिविधियों पर निगरानी के लिए नियमित व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों और गतिविधियों की लगातार जांच होनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि नदी में गंदगी डालने पर रोक लग सके।
बैठक में नदी किनारों पर मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग भी की गई। इसके साथ ही यमुना किनारा रोड से परिवहन कंपनियों को हटाकर अन्य उपयुक्त स्थानों पर भेजने का प्रस्ताव रखा गया। स्वयंसेवकों का कहना था कि नदी के आसपास के क्षेत्र को साफ और व्यवस्थित रखने के लिए वहां होने वाली गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है।
पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए अलग रास्ते
ब्रज खंडेलवाल ने नदी किनारे पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इन रास्तों को लाल रंग से चिह्नित करने की मांग की, जिससे लोग इन्हें आसानी से पहचान सकें। अलग रास्ते होने से पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बैठक में कहा गया कि नदी किनारे आवागमन की बेहतर व्यवस्था से लोगों को सुविधा मिलेगी और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा को बढ़ावा दिया जा सकेगा। इन रास्तों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने से उनका इस्तेमाल आसान होगा। स्वयंसेवकों ने नदी किनारे के क्षेत्र को नागरिकों के लिए सुरक्षित और उपयोगी बनाने की जरूरत भी बताई।
सरकार और विभागों से समयबद्ध योजना बनाने की मांग
बैठक में कहा गया कि यमुना को बचाने के लिए अलग-अलग कामों को एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है। बांध निर्माण, नदी तल की सफाई, सालभर पानी का बहाव बनाए रखने, नालों के गंदे पानी को अलग दिशा में भेजने और प्रदूषण पर निगरानी जैसे मुद्दों पर सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।
रिवर कनेक्ट अभियान के स्वयंसेवकों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार से मांग की कि बैठक में उठाए गए प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाए और प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू कराया जाए। इसके लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्वयंसेवकों का कहना था कि यमुना को स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे। नदी में पर्याप्त पानी रहने, प्रदूषण पर रोक लगने और किनारों के बेहतर रखरखाव से ही उसके प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बैठक में गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, पंडित जुगल किशोर और मुकेश चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। रिवर कनेक्ट अभियान ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की कि यमुना की स्थिति सुधारने के लिए ठोस पहल की जाए, ताकि नदी आगरा के जनजीवन से जुड़ी रहे और आने वाले समय में उसके संरक्षण के प्रयासों को गति मिल सके।
