आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता सेवा कार्यक्रम में एनएसएस और एनसीसी स्वयंसेवकों ने परिसर की सफाई कर स्वच्छ वातावरण का संदेश दिया। स्वच्छता पखवाड़ा के तहत हुए कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने परिसर की सफाई के साथ आसपास मौजूद लोगों को स्वच्छता के महत्व के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्वच्छ परिसर, स्वच्छ समाज और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम कुलपति प्रो. आशु रानी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस दौरान कुलसचिव अजय मिश्रा, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह समेत अन्य शिक्षक मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रो. आशु रानी को कुलपति और अजय मिश्रा को कुलसचिव के रूप में दर्ज किया गया है।
स्वच्छता पखवाड़ा के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना रहा। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के स्वयंसेवकों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने परिसर में अलग-अलग स्थानों पर सफाई अभियान चलाया और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक किया। सफाई के दौरान स्वयंसेवकों ने परिसर में स्वच्छता बनाए रखने, कचरे को इधर-उधर न फेंकने और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जरूरत बताई।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने स्वच्छता को केवल किसी विशेष दिन या अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजमर्रा की आदत बनाने का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने लोगों को बताया कि साफ-सफाई का सीधा संबंध स्वस्थ वातावरण से है और परिसर, घर तथा आसपास के सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में हर व्यक्ति की भूमिका होती है। इस दौरान स्वच्छ वातावरण के निर्माण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम का आयोजन और संचालन एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीरज कुशवाहा के निर्देशन में किया गया। उन्होंने स्वयंसेवकों की भागीदारी को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि स्वच्छता किसी एक दिन का काम नहीं है। इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत है। उन्होंने स्वयंसेवकों से स्वच्छता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि सफाई को लेकर जागरूकता केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित न रहे।
स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के दौरान अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश दिया। विद्यार्थियों की भागीदारी से कार्यक्रम में सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव दिखाई दिया। एनएसएस और एनसीसी से जुड़े विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान में स्वयं हिस्सा लेकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई केवल सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि वहां आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति निरंतर जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान का वातावरण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और व्यवहार पर प्रभाव डालता है। स्वच्छ परिसर विद्यार्थियों को स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है। इसी सोच के साथ स्वयंसेवकों ने परिसर की सफाई में भाग लिया और स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में स्वच्छता को सामाजिक सेवा से जोड़कर विद्यार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। स्वयंसेवकों ने सफाई अभियान में भाग लेने के साथ उपस्थित जनसमुदाय को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कचरे का उचित निस्तारण, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और आसपास के वातावरण को साफ रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। लोगों से अपने घर और परिसर के साथ सार्वजनिक स्थानों को भी साफ रखने की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्वच्छ परिसर, स्वच्छ समाज और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। इस संकल्प के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने दैनिक व्यवहार में स्वच्छता को शामिल करने और आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों की सहभागिता को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा भावना से जोड़कर देखा गया।
विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण रहा। एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवकों ने सफाई अभियान में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सेवा की भावना को व्यवहार में उतारा। परिसर में सफाई करने के साथ उन्होंने लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्वच्छ वातावरण केवल सरकारी या संस्थागत प्रयासों से नहीं बन सकता, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नियमित भागीदारी जरूरी है।
डॉ. नीरज कुशवाहा के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने स्वच्छता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मौजूद विश्वविद्यालय के अधिकारियों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों की सहभागिता को प्रोत्साहित किया। स्वच्छता पखवाड़ा के तहत आयोजित इस पहल ने विद्यार्थियों में सफाई, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के साथ विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर मिला। स्वच्छता को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने, आसपास के वातावरण को साफ रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र रहा। अंत में स्वच्छ परिसर और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में निरंतर सहयोग देने का संकल्प लिया गया।
