आगरा। पीत वस्त्रों में सजीं 800 महिलाओं की कलश यात्रा, संत रविदास के जीवन-दर्शन को दर्शाती झांकियां और भक्ति के साथ सामाजिक समानता का संदेश। नंद सिनेमा से बीएसएनएल ग्राउंड, तारघर चौराहे तक निकली कलश यात्रा के साथ शुक्रवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय समरसता महोत्सव का शुभारंभ हुआ। यात्रा में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किए। झांकियों के माध्यम से संत रविदास के जीवन, उनकी भक्ति और सामाजिक समरसता के विचारों को प्रस्तुत किया गया। बीएसएनएल ग्राउंड पर आयोजित समारोह में वक्ताओं ने संत रविदास के विचारों को अपनाने और जातिगत भेदभाव से मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया।

समारोह में अखिल भारतीय समरसता प्रमुख रविंद्र तिलकोरी मुख्य अतिथि और कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य विशिष्ट अतिथि रहीं। मेयर हेमलता दिवाकर ने संत रविदास के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्यसभा सदस्य नवीन जैन, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, पक्षालिका सिंह, डॉ. जीएस धर्मेश, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, क्षेत्र कार्यवाह प्रमोद शर्मा, अखिल भारतीय टोली सदस्य देवराज और अखिल भारतीय घोष प्रमुख जगदीश मौजूद रहे।

अखिल भारतीय समरसता प्रमुख रविंद्र तिलकोरी ने कहा कि संत रविदास ने जातिगत विषमता और सामाजिक भेदभाव का सामना किया, लेकिन अपने दर्द को क्रोध और द्वेष में बदलने के बजाय वाणी, भजन, सेवा और करुणा का माध्यम बनाया। यही उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता थी। संत रामानंद की परंपरा से निकली उनकी साधना जाति के बंधनों से मुक्त थी। उनके शिष्यों में राजा-महाराजा, काशी के पंडित और राजघरानों की महिलाएं तक शामिल थीं। उनका जीवन बताता है कि आध्यात्मिकता और सम्मान पर किसी एक वर्ग का अधिकार नहीं है। उन्होंने संत रविदास के बेगमपुरा के विचार को सामाजिक समानता का आदर्श बताते हुए कहा कि वे ऐसे समाज की कल्पना करते थे, जहां प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र हो। जाति और स्त्री-पुरुष के आधार पर कोई भेदभाव न हो तथा सभी को सम्मान और पर्याप्त संसाधनों के साथ जीवन जीने का अवसर मिले। उनकी 650वीं जयंती उनके विचारों को जीवन में उतारने का अवसर है।

कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि संत रविदास ने अपने कर्म और भक्ति से सिद्ध किया कि व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। आगरा जैसे प्राचीन चर्म एवं जूता उद्योग वाले शहर में संत रविदास की जयंती का आयोजन विशेष महत्व रखता है। उनकी भक्ति के केंद्र में मानव सेवा और सामाजिक भेदभाव का अंत था। केवल बाहरी आडंबर छोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन के भीतर मौजूद भेदभाव को समाप्त करना ही वास्तविक समरसता है।
मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन और कर्मों से साबित किया कि मनुष्य की महानता का आधार उसका जन्म नहीं, बल्कि उसके कर्म हैं। उन्होंने भक्ति के साथ समाज को समानता, मानवता और भाईचारे का संदेश दिया। उनका बेगमपुरा ऐसा समाज था, जहां कोई भेदभाव न हो, कोई भूखा न रहे और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सके। मन के भीतर के भेदभाव को समाप्त करना ही संत रविदास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
महोत्सव स्थल पर संत रविदास के जीवन, व्यक्तित्व और विचारों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें उनके सामाजिक योगदान के साथ एमएसएमई एवं चर्मकर व्यवसाय से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम और सचिव अभिनव मौर्य ने बताया कि शनिवार को दोपहर तीन बजे सुखमनी सेवा सभा के संस्थापक सरदार महेंद्र पाल सिंह सत्संग में प्रवचन देंगे। शाम छह बजे कवि सम्मेलन आयोजित होगा। महोत्सव के अंतिम दिन कथा व्यास भाई जी अजय, दिल्ली संत रविदास कथा सुनाएंगे। इसके बाद रामदासिया समाज सम्मान समारोह में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं और अन्य प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
मीडिया प्रभारी विजय सामा ने बताया कि विभिन्न स्कूलों में संत रविदास के जीवन पर निबंध प्रतियोगिताएं भी कराई गई हैं। प्रतियोगिता के विजेताओं और प्रतिभागी प्रतिभावान बच्चों को सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में अध्यक्ष रमेश कर्दम, सचिव अभिनव मौर्य, प्रचार प्रमुख विजय सामा, स्वागत महामंत्री हर्ष दिवाकर, सोशल मीडिया प्रमुख प्रमोद महाजन, संरक्षक मनोज राजोरा, अभिषेक कोटिया, अशोक पिप्पल, डॉ. निष्ठा शर्मा, अंजली, पार्षद हेमा चौहान, पार्षद अनुराग चतुर्वेदी, योगेंद्र प्रधान, मानसिंह चौधरी, राकेश जाटव, राहुल बैठ, अरविंद सक्सेना, राजेंद्र गौतम, राहुल उपाध्याय, पार्षद प्रदीप अग्रवाल, प्रशांत सोनी, चंद्रप्रकाश, मयंक दुबे, चंद्रपाल राना, ललित शर्मा, शुभम कश्यप, शिविर जैन, दीप विनायक, रवि शर्मा, सोनू डोगरा, प्रशांत चौहान, अवधेश शर्मा और गोविंद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
