आगरा। जीवन में आने वाले दुख और परेशानियां मनुष्य की परीक्षा लेती हैं, लेकिन भगवान का स्मरण और श्रीमद्भागवत के बताए मार्ग पर आचरण उसे इन परिस्थितियों से उबरने की शक्ति देता है। हलवाई की बगीची स्थित श्री नाथजी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सती, ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। व्यासपीठ से आचार्य सुभाष चन्द शास्त्री महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान के नाम का स्मरण करने और धर्म के मार्ग पर जीवन आगे बढ़ाने का संदेश दिया। कथा के दौरान भक्ति और जयकारों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथावाचक सुभाष चन्द शास्त्री महाराज ने कहा कि जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार लगाने के लिए भगवान का नाम ही एकमात्र सहारा है। संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसके जीवन में किसी न किसी तरह का दुख या परेशानी न हो। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को ईश्वर का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख और दुख जीवन के साथ चलते रहते हैं। ऐसे में श्रीमद्भागवत मनुष्य को सही जीवन पद्धति अपनाने और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने का मार्ग दिखाती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने आचरण और व्यवहार को भागवत के सिद्धांतों के अनुरूप ढाल ले तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगता है। भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखने से मन को शांति मिलती है और कठिन समय में परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिलता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और सदाचार के महत्व से जुड़े प्रसंग भी सुनाए गए।
सती चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव की आज्ञा की अवहेलना कर सती अपने पिता के घर पहुंचीं। वहां उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। पिता के व्यवहार और भगवान शिव के प्रति किए गए अपमान से वह अत्यंत आहत हुईं। इस घटना से दुखी होकर सती ने स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को परिवार, सम्मान और मर्यादा के महत्व से अवगत कराया।
इसके बाद ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए भक्ति और दृढ़ संकल्प की महत्ता बताई गई। कथा में भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले ध्रुव के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। प्रह्लाद चरित्र के माध्यम से भी भगवान के प्रति विश्वास और भक्ति की शक्ति का वर्णन किया गया। कथा के प्रसंग आगे बढ़ने के साथ मंदिर में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूबते रहे।
कथावाचन के बीच श्रद्धालुओं ने राधे-राधे, गोविंद राधे के जयकारे लगाए। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और भगवान के भजनों में सहभागिता की। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं में कथा के अगले प्रसंगों को लेकर भी उत्साह दिखाई दिया।
मुख्य यजमान वंदना सक्सेना ने बताया कि कथा के चौथे दिन वामन चरित्र, राम जन्म और कृष्ण नंदोत्सव के प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा का आयोजन चार अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक किया जा रहा है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने की अपील की है।
कार्यक्रम में कुसुम कालरा, विभा सक्सेना, कुसुम कुलश्रेष्ठ, आवाहन श्रीवास्तव, दीपक शर्मा, देवेंद्र, सुरेंद्र, सुनील, अजय, संजय, दिनेश, शालिनी, अंजना, भव्या, ज्योति, करुणा और मिनी मौजूद रहे।
