फतेहाबाद। रक्षाबंधन के दौरान थाना क्षेत्र में लूट की आधा दर्जन घटनाओं को अंजाम देने वाले मामा-भांजे गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के दो सगे भाइयों भावसिंह और भीमसेन को पकड़ने के साथ लूट का सामान खरीदने वाले सुनार शिवकुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, दो तमंचे, तीन कारतूस और अपाचे मोटरसाइकिल बरामद की है। गिरोह का एक सदस्य वीकेश पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
सहायक पुलिस आयुक्त फतेहाबाद इमरान अहमद ने बताया कि रक्षाबंधन के समय थाना फतेहाबाद क्षेत्र में लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले आपस में रिश्तेदार थे। जेल भेजा गया वीकेश अपने मामाओं के साथ वारदात करता था। गिरोह के सदस्य दो मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करते थे। एक वाहन पर सवार लोग पहले मौके की निगरानी करते थे, जबकि दूसरी बाइक पर बैठे सदस्य लूट की घटना को अंजाम देते थे। वारदात के बाद दोनों मोटरसाइकिलों से अलग-अलग रास्ते से भाग जाते थे।
मंगलवार को पुलिस को घटना में वांछित आरोपियों के प्रतापपुरा पुलिया के पास से निकलने की सूचना मिली। इसके बाद सर्विलांस सेल, एसओजी और थाना फतेहाबाद पुलिस ने इलाके में चेकिंग शुरू कर दी। पुलिस टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर रखी थी। इसी दौरान एक बाइक पर दो लोग आते दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया।
पकड़े गए पहले व्यक्ति ने अपना नाम भावसिंह पुत्र होतम सिंह निवासी बमुरियाई, थाना निबोहरा बताया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 315 बोर का तमंचा, दो कारतूस, 3600 रुपये, सोने की नाक की नथुनी और चांदी की करधनी बरामद हुई। उसके पास से अपाचे मोटरसाइकिल भी मिली।
बाइक पर पीछे बैठे दूसरे व्यक्ति ने अपना नाम भीमसेन पुत्र होतम सिंह निवासी बमुरियाई, थाना निबोहरा बताया। उसके पास से 3500 रुपये, सोने की अंगूठी, एक तमंचा और एक कारतूस बरामद किया गया। पूछताछ में सामने आया कि भावसिंह और भीमसेन सगे भाई हैं। दोनों ने लूट की घटनाओं में रिश्तेदार वीकेश के साथ शामिल होने की बात बताई।
पूछताछ के दौरान भीमसेन ने बताया कि जेल गया वीकेश उसका सगा भांजा है। उसके मुताबिक गिरोह के सदस्य दो मोटरसाइकिलों पर दो-दो लोग बैठकर निकलते थे। एक बाइक पर मौजूद लोग पहले रास्ते और आसपास के लोगों पर नजर रखते थे। दूसरी बाइक से पहुंचे साथी लूट की घटना को अंजाम देते थे। इसके बाद दोनों वाहन वहां से निकल जाते थे।
वारदात के बाद आरोपियों के ठहरने की व्यवस्था भी पहले से तय रहती थी। पूछताछ में बताया गया कि घटना करने के बाद वे दूसरे गांव के लोगों के घरों में शरण लेते थे। सत्यप्रकाश पुत्र सूरज राम निवासी नेहरेकापुरा और राकेश पुत्र हेत सिंह निवासी डंडनियापुरा, थाना निबोहरा के घरों में भी उन्होंने घटनाओं के बाद शरण ली थी।
लूटे गए आभूषणों को ठिकाने लगाने के लिए गिरोह के सदस्य अपनी बहन को साथ लेकर पड़ोसी गांव के सुनार के पास जाते थे। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लूटे हुए माल को अपनी बहन के साथ जाकर सुनार शिवकुमार पुत्र लायक सिंह निवासी बाग कॉलोनी, कस्बा फतेहाबाद को बेचते थे। पुलिस ने लूट का सामान खरीदने वाले सुनार शिवकुमार को भी गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य लूट की घटनाओं से मिलने वाले रुपये और सामान का इस्तेमाल अपने मौज-शौक पूरे करने के लिए करते थे। पूछताछ में दोनों भाइयों ने बताया कि वे मौज-शौक पूरा करने के लिए घटनाओं को अंजाम देते थे।
पुलिस ने आरोपियों की शैक्षिक योग्यता की जानकारी भी दी है। भीमसेन इंटर पास है, जबकि भावसिंह ने कक्षा सात तक पढ़ाई की है। दोनों के खिलाफ रक्षाबंधन के समय थाना फतेहाबाद क्षेत्र में हुई लूट की घटनाओं के संबंध में पूछताछ की गई।
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्यों ने घटनाओं को अंजाम देने के लिए अलग-अलग भूमिकाएं तय कर रखी थीं। निगरानी के लिए अलग बाइक का इस्तेमाल किया जाता था और दूसरी मोटरसाइकिल से वारदात की जाती थी। घटना के बाद आरोपियों के पास पहले से तय ठिकाने मौजूद थे, जहां पहुंचकर वे कुछ समय के लिए रुक जाते थे। लूटे गए आभूषणों को भी परिचित माध्यम से बेचने की व्यवस्था की गई थी।
कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद विनोद कुमार मिश्रा, सर्विलांस प्रभारी सचिन तोमर, एसओजी प्रभारी रजत शर्मा, उपनिरीक्षक सुमित यादव और सागर सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में भावसिंह और भीमसेन को पकड़ा गया। गिरोह से जुड़े वीकेश को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। लूट का सामान खरीदने वाले सुनार शिवकुमार की गिरफ्तारी भी की गई है। आरोपियों के पास से बरामद नकदी, आभूषण, हथियार और मोटरसाइकिल को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है।
रक्षाबंधन के दौरान हुई लूट की घटनाओं के खुलासे के बाद पुलिस ने गिरोह के काम करने के तरीके की जानकारी सामने रखी है। रिश्तेदारी के आधार पर जुड़े सदस्य दो मोटरसाइकिलों से निकलते थे, पहले निगरानी करते और फिर वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते थे। इसके बाद दूसरे गांवों में शरण लेकर लूटे गए आभूषणों को सुनार के माध्यम से बेच दिया जाता था।

