आगरा। 149वें श्री रामलीला महोत्सव के तहत मंगलवार को लंकापति महाराज रावण की भव्य शोभायात्रा निकली तो रावतपाड़ा से लेकर शहर के प्रमुख बाजारों तक लंका का वैभव और दशानन का रौद्र रूप नजर आया। हाइड्रोलिक जगमगाते अश्व रथ पर सवार रावण ने तलवार लहराकर युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। ताड़का, साधुओं की कैद, रावण की सेना, विशाल कुंभकरण और मेघनाद के पराक्रम की झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। रावण की अट्टहास भरी मुद्रा और विशाल स्वरूप को देखने के लिए बाजारों में भीड़ जुटी रही। खासकर बच्चे लंका की सेना, कुंभकरण और दशानन के अलग-अलग रूपों को अपलक देखते रहे। शोभायात्रा के दौरान बैंडों की धुन, पुष्पवर्षा और झांकियों के बीच देर तक उत्सवी माहौल बना रहा।
149वें श्री रामलीला महोत्सव के तहत मंगलवार की शाम शहर की ऐतिहासिक गलियां लंका के वैभव, शौर्य और रौद्रता से जीवंत हो उठीं। श्री रामलीला कमेटी की ओर से लंकापति महाराज रावण की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रावतपाड़ा तिराहे से शुरू हुई शोभायात्रा में लंका की सेना, ताड़का, साधुओं की कैद, कुंभकरण, मेघनाद और अंत में स्वयं दशानन का भव्य स्वरूप लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

शोभायात्रा का शुभारंभ श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने बताया कि रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवा पीढ़ी का जुड़ाव रामलीला से और गहरा करना है। कमेटी का प्रयास है कि धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक परंपराओं को कायम रखते हुए सभी आयोजनों को भव्य और व्यवस्थित रूप दिया जाए।
रावतपाड़ा तिराहे से निकली शोभायात्रा में सबसे आगे दो ऊंट चल रहे थे। इनके पीछे ताड़का की सवारी थी। विशाल और भयावह स्वरूप में सजी ताड़का को देखने के लिए लोग रुक गए। इसके बाद जेल की झांकी थी, जिसमें साधुओं को बंद दिखाया गया। झांकी के माध्यम से रावण के अत्याचार और साधु-संतों पर किए गए उत्पीड़न को प्रदर्शित किया गया।

इसी क्रम में दशानन की दो तोपें भी सजी थीं। तोपों से गोले फेंकने का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखकर लोगों में युद्ध जैसा रोमांच पैदा हुआ। झांकियों और सवारी के इस क्रम ने शोभायात्रा को लगातार आकर्षण बनाए रखा।
जेल की झांकी के बाद रावण के सेनापतियों की झांकी निकली। इसके पीछे कुंभकरण का विशाल स्वरूप था। विराट कद और सजी हुई झांकी लोगों का ध्यान खींच रही थी। कुंभकरण की झांकी के आगे आगरा का प्रमुख सुधीर बैंड मधुर धुनें बजाते हुए चल रहा था। बैंड की धुनों के साथ आसपास के बाजारों का माहौल उत्सवी बना रहा।
कुंभकरण की झांकी के बाद रावण के पुत्र और प्रमुख योद्धा मेघनाद यानी इंद्रजीत का सुसज्जित रथ था। रथ की सजावट और योद्धा के रूप में मेघनाद की प्रस्तुति लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। युवराज इंद्रजीत के रथ के आगे मिलन बैंड अपनी मधुर धुनों के साथ चल रहा था।
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण अंत में चल रहा स्वयं महाराज दशानन का सुसज्जित और जगमगाता अश्व रथ रहा। हाइड्रोलिक रथ पर सवार रावण का विशाल स्वरूप दूर से ही दिखाई दे रहा था। रथ पर खड़े दशानन ने दोनों हाथों से तलवार लहराते हुए युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। तलवार हवा में घूमते ही दर्शकों की निगाहें उस पर टिक जाती थीं।
दशानन का भव्य श्रृंगार, रौद्र रूप, अट्टहास और रथ की रोशनी ने सवारी की भव्यता को और बढ़ा दिया। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा की। रावतपाड़ा पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने दशानन को माला पहनाकर स्वागत किया।
मंगलवार होने के कारण रावतपाड़ा और आसपास के बाजारों में काफी भीड़ रही। लंका की सेना और झांकियों को देखकर छोटे बच्चे खासे उत्साहित नजर आए। कई बच्चे बिना पलक झपकाए रावण, कुंभकरण, मेघनाद और ताड़का के स्वरूप देखते रहे। रावण का विशाल चेहरा, अट्टहास भरी मुद्रा और तलवारबाजी बच्चों के लिए विशेष आकर्षण रही।
शोभायात्रा में सुधीर और मिलन बैंड के अलावा आगरा के प्रमुख मोहन एवं सुदित बैंड भी मधुर धुनें बिखेरते हुए चल रहे थे। बैंडों की प्रस्तुतियों और झांकियों के साथ पूरा वातावरण उत्सव और भक्ति से भर गया।

महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि शोभायात्रा रावतपाड़ा तिराहे से शुरू होकर जौहरी बाजार, सुभाष बाजार, दरेसी नंबर-1 व 2, छत्ता बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज, पथवारी, धूलियागंज, घटिया, फुलट्टी बाजार, किनारी बाजार और कसेरट बाजार से होकर गुजरी। इसके बाद शोभायात्रा पुनः रावतपाड़ा पहुंचकर संपन्न हुई।
पूरे मार्ग में लोगों और व्यापारियों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। झांकियों के साथ चल रही भीड़ और बैंडों की धुनों ने बाजारों में देर तक उत्सवी माहौल बनाए रखा।
