आगरा। जनकपुरी महोत्सव में इस बार मां जानकी के जन्म का प्रसंग गीत, नृत्य और मिथिला की पारंपरिक बधाइयों के साथ जीवंत होगा। 2 अक्टूबर को श्री रामलीला महोत्सव में मंचित होने वाले सीता जन्म प्रसंग को विशेष बनाने के लिए जनकपुरी महोत्सव महिला समिति की सदस्याएं तैयारियों में जुटी हैं। भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय पर महिलाएं प्रतिदिन अभ्यास कर रही हैं। ‘मिथिला मगन भई, आज सिया का जनम भयो’ और ‘सिया का जनम भयो’ जैसे बधाई गीतों पर भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति तैयार की जा रही है। समिति की कोशिश है कि मां जानकी के जन्म की खुशी और मिथिला के उल्लास को नृत्य के माध्यम से मंच पर इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि श्रद्धालु उस भाव से जुड़ सकें।
श्री रामलीला महोत्सव को लेकर शहर में तैयारियां तेज हो गई हैं। जनकपुरी महोत्सव की तैयारियों में जहां धार्मिक आयोजनों को लेकर तैयारियां चल रही हैं, वहीं अब सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग भी दिखाई देने लगा है। भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय इन दिनों महिला समिति की सदस्याओं के अभ्यास का केंद्र बना हुआ है। महिलाएं रोजाना एक साथ जुटकर गीत, नृत्य और प्रस्तुति से जुड़े अलग-अलग पहलुओं का अभ्यास कर रही हैं।
जनकपुरी महोत्सव महिला समिति की अध्यक्ष अमृता पोरवाल ने बताया कि 2 अक्टूबर को श्री रामलीला महोत्सव में मां जानकी के जन्म का प्रसंग मंचित किया जाएगा। मां जानकी के जन्म की खुशी को विशेष रूप से प्रस्तुत करने के लिए महिला समिति की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इसमें मिथिला के पारंपरिक बधाई गीतों को आधार बनाया गया है। ‘मिथिला मगन भई, आज सिया का जनम भयो’ और ‘सिया का जनम भयो’ जैसे गीतों पर महिलाएं नृत्य की प्रस्तुति देंगी।
उन्होंने बताया कि समिति की सदस्याएं प्रतिदिन भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी कार्यालय पर अभ्यास कर रही हैं। अभ्यास के दौरान गीत की लय, नृत्य की भाव-भंगिमा, एक-दूसरे के साथ तालमेल और मंच पर प्रस्तुति के क्रम को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। महिलाओं का प्रयास है कि कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति में कहीं कोई कमी न रहे और मां जानकी के जन्म का प्रसंग पूरी गरिमा और भावनात्मकता के साथ प्रस्तुत हो।
महिला समिति की सदस्याएं नृत्य के माध्यम से मिथिला की पारंपरिक खुशी और उल्लास को जीवंत करने की तैयारी कर रही हैं। बधाई गीतों के साथ मां जानकी के जन्म की खुशी, जनकपुरी में छाए उत्सव और परिवार में बेटी के जन्म पर होने वाले उल्लास को प्रस्तुति में शामिल किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान महिलाएं गीतों के भाव को समझते हुए उसी के अनुरूप नृत्य की मुद्राओं और प्रस्तुति को तैयार कर रही हैं।
समिति का उद्देश्य केवल नृत्य प्रस्तुति देना नहीं है, बल्कि रामलीला के दौरान सीता जन्म प्रसंग को सांस्कृतिक और भावपूर्ण रूप में दर्शाना भी है। इसके लिए पारंपरिक गीतों का चयन किया गया है। गीतों के जरिए उस समय के मिथिला के वातावरण और मां जानकी के जन्म पर मनाए गए उत्सव की कल्पना को मंच पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला समिति की अध्यक्ष अमृता पोरवाल ने बताया कि जनकपुरी महोत्सव धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन होने के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का भी माध्यम है। इसी को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की टीम इस प्रस्तुति की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि मां जानकी का जन्म प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष भावनाओं से जुड़ा है। ऐसे में प्रस्तुति में गीत, नृत्य और भावों का संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
अभ्यास के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से बधाई गीत गाती हैं और उनके साथ नृत्य की प्रस्तुति करती हैं। एक साथ कदम और भाव-भंगिमा में तालमेल बैठाने के लिए बार-बार अभ्यास किया जा रहा है। मंच पर प्रस्तुति के दौरान गीत की शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक किस तरह समूह आगे बढ़ेगा, इसका भी अभ्यास किया जा रहा है। इससे कार्यक्रम के दिन प्रस्तुति व्यवस्थित और प्रभावी दिखाई दे सके।
महिलाओं का कहना है कि मां जानकी के जन्म का प्रसंग केवल धार्मिक कथा का हिस्सा नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा और लोकभावना से भी जुड़ा हुआ है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए बधाई गीतों का चयन किया गया है। ‘मिथिला मगन भई, आज सिया का जनम भयो’ गीत के माध्यम से मिथिला में छाई खुशी को दर्शाने की तैयारी है। वहीं ‘सिया का जनम भयो’ गीत पर भी महिलाएं नृत्य की प्रस्तुति तैयार कर रही हैं।
जनकपुरी महोत्सव को लेकर चल रही इन तैयारियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है। धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर भी उत्साह है। समिति की सदस्याएं नियमित रूप से अभ्यास में शामिल होकर अपनी प्रस्तुति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। कार्यक्रम को लेकर महिलाओं के बीच आपसी सहयोग और सामूहिक भागीदारी भी देखने को मिल रही है।
सीता जन्म प्रसंग के मंचन के दौरान महिला समिति की यह प्रस्तुति जनकपुरी महोत्सव के सांस्कृतिक पक्ष को सामने रखेगी। समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को मां जानकी के जन्म की खुशी और मिथिला की परंपरागत बधाई संस्कृति का अनुभव कराया जा सके। इसके लिए अभ्यास का सिलसिला लगातार जारी है।
तैयारियों में ममता अरोड़ा, अमृता पोरवाल, जूली अग्रवाल, वाणी चौहान, मीनू सिंह, शालिनी बंसल, रीना सिंह, पूजा चौहान, सपना लुथरा, ट्विंकल बंसल, डॉ. अनामिका शर्मा, सुनीता शर्मा, ज्योति सिंह, मीना पाठक, संगीता श्रीवास्तव, अल्का सिंह, दीपिका माहेश्वरी, शैलेश शर्मा, आशा गुप्ता, मीनाक्षी जादौन, रुचि बंसल और रोहिणी शर्मा नियमित रूप से अभ्यास में सहभागिता कर रही हैं।
2 अक्टूबर को होने वाली प्रस्तुति के लिए महिला समिति की तैयारियां लगातार जारी हैं। गीत और नृत्य के अभ्यास के साथ महिलाएं मां जानकी के जन्म प्रसंग को भावपूर्ण बनाने में जुटी हैं। बधाई गीतों की गूंज और नृत्य के माध्यम से मिथिला की खुशी को मंच पर उतारने की यह तैयारी जनकपुरी महोत्सव के सांस्कृतिक आयोजन को खास रंग देने जा रही है।
