फतेहाबाद। आगरा-फतेहाबाद मार्ग पर सोमवार रात तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े शीशम के पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार सवार दो दोस्तों की मौत हो गई। चालक जोगेंद्र कार में फंस गया था। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने करीब दस मिनट की मशक्कत के बाद दोनों को कार से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर घर पहुंचते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। जोगेंद्र की मां बेटे की मौत का सदमा सह नहीं सकीं और बार-बार बेहोश होती रहीं, जबकि पिता बेसुध होकर बेटे को तलाशते रहे। वहीं पांच और दो वर्ष के दो मासूम बेटे यह तक नहीं समझ पा रहे थे कि उनके पिता अब कभी घर लौटकर नहीं आएंगे।

हादसा सोमवार रात करीब 11:30 बजे थाना डौकी क्षेत्र में टंकी चौराहे के पास आगरा-फतेहाबाद मार्ग पर हुआ। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सलेमपुर धनगर, थाना निबोहरा निवासी अजब सिंह के पुत्र गजेंद्र की उम्र करीब 26 वर्ष थी। करीब डेढ़ वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और उसके कोई बच्चा नहीं था।

बताया गया कि सोमवार को गजेंद्र अपने दोस्त कुतकपुर गोला, थाना फतेहाबाद निवासी चरन सिंह के पुत्र जोगेंद्र उर्फ जुगनू के साथ कार से आगरा गया था। दोनों कार में टायर डलवाने के लिए गए थे। रात में आगरा से लौटते समय जोगेंद्र कार चला रहा था। करीब 11:30 बजे जब दोनों टंकी चौराहे के पास पहुंचे, तभी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े शीशम के पेड़ से जा टकराई।

टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। कार की स्थिति देखकर हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता था। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और चालक जोगेंद्र उसमें फंस गया था। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से करीब दस मिनट बाद जोगेंद्र को कार से बाहर निकाला। दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार के अगले हिस्से को जिस तरह नुकसान पहुंचा है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसे के समय कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रही होगी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही होगी।
जोगेंद्र की मौत ने उसके परिवार को गहरा सदमा दिया है। परिजनों के मुताबिक कालीचरन के पांच बेटियों के बाद जोगेंद्र इकलौता बेटा था। उसकी तीन बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि रश्मि और काजल की शादी अभी नहीं हुई है। जोगेंद्र के दो बेटे हैं। पांच वर्षीय गौरव और दो वर्षीय सुशांत पिता की मौत से अनजान हैं। परिवार में मौत की खबर के बाद से दोनों मासूम अपनी मां रामसखी से लिपटकर रो रहे थे। वे बार-बार पूछ रहे थे कि पापा कहां गए हैं और अभी तक घर क्यों नहीं आए। घर में मौजूद लोगों को रोता देखकर वे यह भी पूछ रहे थे कि सभी लोग क्यों रो रहे हैं। मासूमों के सवालों का जवाब देते परिजनों के लिए भी स्थिति बेहद भावुक करने वाली थी।
जोगेंद्र की मौत की खबर सुनते ही उसकी मां किशनदेवी बार-बार बेहोश हो रही थीं। आसपास मौजूद महिलाएं पानी डालकर उन्हें होश में ला रही थीं। कुछ देर बाद होश में आने पर वह रोते हुए बार-बार कह रही थीं, “अब बुढ़ापा किसके सहारे कटेगा।” उनका विलाप सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। जोगेंद्र के पिता चरन सिंह भी बेटे की मौत की खबर सुनकर जमीन पर बेसुध पड़े रहे। होश में आने पर वह बार-बार पूछ रहे थे, “मेरा बेटा जोगेंद्र कहां है।” वह कहते रहे कि आसपास सभी लोग दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनका बेटा दिखाई नहीं दे रहा। बेटे को बुढ़ापे का सहारा बताते हुए उनका दर्द देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।
छोटी बहन रश्मि भी भाई की मौत की खबर सुनकर बेसुध होकर जमीन पर पड़ी थी। वह सिर पटक-पटककर रोते हुए पूछ रही थी कि उसका भाई कहां चला गया। रश्मि ने बताया कि कुछ समय पहले ही उसकी जोगेंद्र से बात हुई थी। उस दौरान जोगेंद्र ने कहा था कि वह रास्ते में है और कुछ समय बाद घर पहुंच जाएगा। इसके बाद परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।

