आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बीए के नवप्रवेशी विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ कौशल, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया। पालीवाल परिसर स्थित दीनदयाल ग्राम्य विकास संस्थान में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, एनएसएस, एनसीसी, सांस्कृतिक गतिविधियों और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर लक्ष्य तय करने तथा निरंतर सीखने के साथ कठिन परिश्रम को सफलता का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में बीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय जीवन की शुरुआत को सहज और उद्देश्यपूर्ण बनाने की पहल की गई। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में पालीवाल परिसर स्थित दीनदयाल ग्राम्य विकास संस्थान में बीए के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियों के साथ विश्वविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न अवसरों, गतिविधियों और जिम्मेदारियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज राठौर ने की।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सामाजिक विज्ञान विभाग के निदेशक प्रो. मोहम्मद अरशद ने शिक्षा की व्यवहारिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का व्यवहारिक जीवन में उपयोग करना भी सीखना चाहिए। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र को पहचानकर उसका चयन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी अभिरुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ें, जिससे उनके लिए चुना गया क्षेत्र बोझ के बजाय उपलब्धि का माध्यम बन सके।
प्रो. मोहम्मद अरशद ने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि उच्च शिक्षा के दौरान मिलने वाले अवसरों का उपयोग केवल परीक्षा और डिग्री हासिल करने तक सीमित न रखा जाए। विद्यार्थी अपने भीतर मौजूद प्रतिभा को पहचानें और उसे लगातार विकसित करें। उन्होंने नए विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट रहने और पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तित्व तथा व्यावहारिक ज्ञान को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. मनोज राठौर ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में विद्यार्थियों को अनुशासन, शिक्षा और कौशल के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ कौशल विकसित करना और अनुशासित जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है। उन्होंने सफलता के लिए कठिन परिश्रम को मूल मंत्र बताते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. मनोज राठौर ने विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व के विकास पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितना अधिक सीखने के लिए तैयार रहेंगे, उतनी ही व्यापक उनकी सोच विकसित होगी। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा बनने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि उच्च शिक्षा के दौरान उनका समग्र विकास हो सके।
कार्यक्रम में डॉ. आयुष मंगल ने शिक्षा के व्यापक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं है। शिक्षा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का भी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग समाज के लिए सकारात्मक दिशा में करें और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ें।
डॉ. नीरज कुशवाहा ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने संस्थान और विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया, ताकि वे पढ़ाई के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ सकें।
कार्यक्रम में डॉ. राधिका गोयल ने पीपीटी के माध्यम से विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और दीनदयाल ग्राम्य विकास संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों तथा उपलब्धियों से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। विद्यार्थियों को बताया गया कि एनसीसी जैसी गतिविधियां अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में उपयोगी हो सकती हैं।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों को लेकर उत्सुकता और जिज्ञासा के साथ प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों के सवालों से यह स्पष्ट हुआ कि वे विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई, गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों को लेकर जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर डॉ. आभा सिंह ने गंभीरता और विस्तार से दिए। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई।
कार्यक्रम की संचालक डॉ. तपस्या चौहान ने शिक्षा के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में अपने अध्ययन के दौरान उपलब्ध अवसरों का सकारात्मक उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा नई शैक्षणिक यात्रा के लिए उत्साहित किया।
कार्यक्रम में बीए के विद्यार्थियों काजल, अतुल और यश ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत स्वागत भाषण ने कार्यक्रम को आत्मीयता प्रदान की और नए विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय के वातावरण से परिचित होने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के अंत में माधुरी कौशिक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम में डॉ. भरत सिंह, डॉ. रेखा माथुर, इति गोस्वामी, डॉ. रत्ना पांडेय सहित संस्थान के शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने भी नवप्रवेशी विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें उच्च शिक्षा के दौरान अनुशासन, निरंतर अध्ययन और सकारात्मक गतिविधियों में भागीदारी का महत्व समझाया।
कार्यक्रम के माध्यम से नए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश केवल डिग्री हासिल करने की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह सीखने, अपनी प्रतिभा पहचानने, कौशल विकसित करने और व्यक्तित्व को बेहतर बनाने की लंबी यात्रा है। विद्यार्थियों को शिक्षा के व्यवहारिक पक्ष के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर रहा। एनएसएस, एनसीसी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जानकारी देकर विद्यार्थियों के लिए कक्षा से बाहर सीखने के अवसरों को भी सामने रखा गया।
