मथुरा। विश्व हाथी दिवस से पहले वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाए गए हाथियों की आजीवन देखभाल और उनके कल्याण को बेहतर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत किया है। मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग (एमआईसी) के हाथी देखभाल विशेषज्ञ माइक मैक्लूअर के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में एक सप्ताह बिताकर वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सकों और केयरटेकर्स के साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन किए। इस सहयोग में भारत में बंधक हाथियों को बचाने और उनके पुनर्वास का वाइल्डलाइफ एसओएस का लगभग दो दशकों का अनुभव और हाथियों की देखभाल व केयरटेकर्स की ट्रेनिंग में एमआईसी की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता को जोड़ा गया।

मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में बचाए गए हाथियों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। वाइल्डलाइफ एसओएस और मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग के बीच शुरू हुए इस सहयोग का उद्देश्य केवल हाथियों की तत्काल जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, व्यवहार, सामाजिक जीवन, चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की समग्र गुणवत्ता में लगातार सुधार करना है।
इस पहल के तहत माइक मैक्लूअर के नेतृत्व में मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग की टीम ने मथुरा के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में एक सप्ताह तक वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम के साथ काम किया। इस दौरान पशु चिकित्सकों और हाथियों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में हाथियों की रोजमर्रा की देखभाल से जुड़े ऐसे तरीकों पर काम किया गया, जिन्हें केंद्र में मौजूद हाथियों की जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सके।

प्रशिक्षण के दौरान हाथियों के स्वास्थ्य और व्यवहार को समझने के साथ उनकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए सबूतों पर आधारित तरीकों पर चर्चा और व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा लगातार जानकारी साझा करने और टीमों के बीच सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना रहा। इसका उद्देश्य यह है कि हाथियों की देखभाल से जुड़े अनुभव और विशेषज्ञता केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि आगे भी टीमों के काम का हिस्सा बनें।
क्षमता निर्माण कार्यक्रम के दौरान हाथियों की देखभाल के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। इनमें पैरों की बेहतर देखभाल, चलने-फिरने की क्षमता बढ़ाना, सकारात्मक प्रोत्साहन आधारित प्रशिक्षण, हाथियों के बीच सामाजिक मेलजोल, उनके रहने के वातावरण को बेहतर बनाना और देखभाल करने वाले कर्मचारियों के कौशल का विकास प्रमुख रहे।

बचाए गए कई हाथी अपने पिछले जीवन में कठिन परिस्थितियों से गुजर चुके हैं। ऐसे हाथियों में पुरानी चोटों का असर भी देखा जा सकता है। पैरों की देखभाल और गतिशीलता से जुड़े बेहतर तरीकों से ऐसे हाथियों को आराम देने और उनकी चलने-फिरने की क्षमता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं सकारात्मक प्रोत्साहन वाली ट्रेनिंग का इस्तेमाल हाथियों के साथ बेहतर तरीके से काम करने और उनके व्यवहार को समझने के लिए किया जा सकता है।
हाथियों के सामाजिक व्यवहार को भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। हाथी सामाजिक प्राणी हैं और उनके आपसी रिश्ते उनके कल्याण से जुड़े होते हैं। ऐसे में उनके सामाजिक मेलजोल को समझना और उनके रहने के वातावरण को उनकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करना देखभाल की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशिक्षण में इसी तरह के व्यवहारिक पहलुओं को भी शामिल किया गया, ताकि हाथियों के लिए ऐसा माहौल तैयार किया जा सके, जहां वे स्वस्थ व्यवहार और मजबूत सामाजिक संबंध विकसित कर सकें।

मथुरा के डीएफओ वेंकट श्रीकर पटेल आईएफएस ने कहा कि बचाए गए हाथियों की भलाई के लिए लगातार सीखने, जिम्मेदारी के साथ देखभाल करने और मजबूत सहयोग की जरूरत होती है। उनके अनुसार, इस तरह की पहल जानकारी साझा करने और हाथियों के कल्याण के लिए काम करने वाली टीमों की क्षमता बढ़ाने का बेहतर अवसर उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस की कोशिशों से केंद्र में रखे गए हाथियों की देखभाल के मानकों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथी को बचाना उसकी ठीक होने की लंबी यात्रा की केवल शुरुआत है। उनके मुताबिक संस्था की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि बचाए गए प्रत्येक हाथी को जीवनभर सर्वोत्तम देखभाल मिलती रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से टीम को लगातार सीखने, काम करने के तरीकों में सुधार करने और हाथियों के पुनर्वास व कल्याण से जुड़ी जटिल चुनौतियों को नए दृष्टिकोण से समझने में मदद मिलती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि बचाए गए प्रत्येक हाथी की अपनी अलग कहानी होती है। उनके अनुसार, इन हाथियों के ठीक होने की प्रक्रिया में धैर्य, विशेषज्ञता और लगातार सुधार जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के साथ अपने अनुभव को जोड़कर संस्था अपनी देखरेख में रहने वाले हाथियों की देखभाल की गुणवत्ता को और बेहतर कर सकती है। इससे हाथियों को स्वस्थ होने और बेहतर जीवन जीने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग के माइक मैक्लूअर ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथियों के बचाव से जुड़े कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों का अनुभव रखने वाली एक मजबूत टीम तैयार की है। उन्होंने इस सहयोग को ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार, दोनों संस्थाएं साथ मिलकर हाथियों के कल्याण के लिए नए तरीकों की तलाश जारी रख सकती हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस में कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एमवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त पहल के तहत संचालित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र और वहां रह रहे हाथियों को ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों से महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि हाथियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, उनके सामाजिक व्यवहार को समझने और उनकी देखभाल से जुड़े दुनिया के बेहतर तरीकों को अपनाने से टीमों को लगातार सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इससे कर्मचारियों के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी और हाथियों की देखभाल के तरीकों में लगातार सुधार किया जा सकेगा।
बैजू राज एमवी के मुताबिक, हाथियों की भलाई के मामले में संस्था हमेशा एक कदम आगे रहने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसकी देखरेख में रहने वाले हाथियों को केवल बचाव के समय ही सहायता न मिले, बल्कि उनके पूरे जीवन के दौरान उनकी जरूरतों के अनुसार देखभाल उपलब्ध हो।
वाइल्डलाइफ एसओएस और मैक्लूअर इंटरनेशनल कंसल्टिंग का यह सहयोग इसी दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है। इसमें पशु चिकित्सकों के साथ-साथ हाथियों की प्रत्यक्ष देखभाल करने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। स्वास्थ्य, व्यवहार, गतिशीलता, सामाजिक मेलजोल और पर्यावरण जैसे अलग-अलग पहलुओं को एक साथ लेकर चलने से हाथियों के कल्याण को व्यापक रूप से बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त से पहले शुरू हुआ यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग मथुरा के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में बचाए गए हाथियों की देखभाल की प्रक्रिया में विशेषज्ञ ज्ञान के निरंतर इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वाइल्डलाइफ एसओएस का लगभग दो दशक का बचाव और पुनर्वास अनुभव तथा एमआईसी की अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता मिलकर ऐसे तरीकों को विकसित करने में मदद कर सकती है, जिनका लाभ केंद्र में रहने वाले हाथियों को लंबे समय तक मिल सके।
