आगरा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल बड़ी कंपनियों, चुनिंदा संस्थानों या तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित रहने वाली तकनीक नहीं है। आने वाले समय में देश की ताकत इस बात से तय होगी कि उसके पास अपने एआई मॉडल, अत्याधुनिक तकनीक और साइबर-कुशल युवा कितनी संख्या में हैं। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में एआई की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और इसके लिए जरूरी है कि इसकी पहुंच गांवों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी हो।

युवाओं और स्टार्टअप्स को एआई तकनीक के लिए आवश्यक GPU सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम कर रही है। यह बात केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शनिवार को होटल जेपी पैलेस एवं कन्वेंशन सेंटर में आयोजित AI FutureReady Conclave 2026 में कही।
जितिन प्रसाद ने कहा कि आने वाले समय में दुनिया की ताकत केवल हथियारों के आधार पर तय नहीं होगी। जिन देशों के पास अपने एआई मॉडल, अत्याधुनिक तकनीक और साइबर-कुशल युवा होंगे, वे वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत स्थिति में होंगे। भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए एआई की पहुंच समाज के सीमित वर्ग तक रखने के बजाय इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और टियर-2 व टियर-3 शहरों में रहने वाले युवाओं और प्रतिभाओं को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने लोगों से भारतीय एआई मॉडल और सॉफ्टवेयर को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देश में विकसित तकनीकों के इस्तेमाल से डेटा की सुरक्षा और डेटा की संप्रभुता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। भारत को अपनी एआई क्षमता को लगातार मजबूत करते हुए स्वदेशी एआई इकोसिस्टम विकसित करना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्तर प्रदेश को बताया देश की विकास यात्रा का ग्रोथ इंजन
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश के ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के माध्यम से दुनिया के अनेक बाजार भारतीय कारोबारियों के लिए खुल रहे हैं। भारत के पास बड़ी युवा आबादी, विशाल बाजार और कुशल मानव संसाधन की ताकत है। ऐसे में विदेशी कंपनियों को भारत को केवल एक बाजार के रूप में देखने के बजाय यहां साझेदार बनकर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक भारत की युवा शक्ति, बाजार और कुशल मानव संसाधन देश को वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ कॉन्क्लेव
AI FutureReady Conclave 2026 का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, डीसीएफएलआई एवं सीसीएलए के चेयरमैन पूरन डावर, डॉ. एमपीएस ग्रुप के चेयरमैन स्क्वाड्रन लीडर ए.के. सिंह, शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के प्रो वाइस चेयरमैन वाईके गुप्ता, सीसीएलए के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजेश गर्ग, एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, ओएनजीसी के निदेशक सत्यन कुमार, रोमसंस ग्रुप के एमडी किशोर खन्ना, प्रील्यूड पब्लिक स्कूल के निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता, लघु उद्योग भारती के जिला अध्यक्ष विजय गुप्ता और नेशनल चेंबर के अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कॉन्क्लेव में एआई, रोबोटिक्स, उद्योग, शिक्षा, कृषि, स्टार्टअप, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और युवा नवाचारकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीक से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के बीच संवाद स्थापित करने और एआई के व्यावहारिक उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा का मंच उपलब्ध कराना रहा।

एआई के इस्तेमाल में पीछे रहे तो सुपर एआई में भी पिछड़ने का खतरा
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि एआई विकास के लिए आवश्यक बन चुका है और शिक्षा के क्षेत्र को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यदि एआई का उपयोग नहीं किया गया तो तकनीकी विकास की दौड़ में पीछे रह जाने का खतरा है। भविष्य में सुपर एआई के क्षेत्र में भी देश को पिछड़ने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए एआई को समझना, उसका उपयोग करना और बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ना जरूरी है।
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने अपने संबोधन में Gen-Z पीढ़ी की बदलती सोच और तकनीकी समझ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव में नई पीढ़ी के विचार और तकनीकी दृष्टिकोण सुनने को मिले, जो आने वाले समय की दिशा को दर्शाते हैं। उनके अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के विकास, शिक्षा, रोजगार और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने वाली महत्वपूर्ण तकनीक है।
उन्होंने युवाओं से एआई और नई तकनीकों का ज्ञान हासिल कर बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने फिशरी और डेयरी उत्पादों के बढ़ते निर्यात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया भारत की ओर देख रही है। प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने के लिए सभी के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने एआई की डाटा-ड्रिवन तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल करने की अपील भी की।
छोटे शहर का दुकानदार भी पहुंच सकता है वैश्विक बाजार तक
सीसीएलए एवं डीसीएफएलआई के चेयरमैन पूरन डावर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। एआई की मदद से छोटे शहर या एक गली में बैठा दुकानदार भी अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकता है। तकनीक ने बाजार तक पहुंचने के तरीकों को बदलने की क्षमता दिखाई है और एआई के प्रभावी इस्तेमाल से छोटे कारोबारी भी व्यापक बाजार से जुड़ सकते हैं।

पूरन डावर ने एआई की अवधारणा को समझाने के लिए मारीच की माया का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एआई की अवधारणा पूरी तरह नई नहीं है। मानव सभ्यता के विकास के साथ तकनीक लगातार बदलती रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को मानव का विकल्प बनाने के बजाय उसकी क्षमता और कुशलता बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। एआई के प्रभावी उपयोग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।
पैनल डिस्कशन में पर्यटन से लेकर शिक्षा और उद्योग तक मंथन
कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में आयोजित पैनल डिस्कशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, शिक्षा, वित्त, विधि, उद्यमिता और उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने एआई की संभावनाओं तथा भविष्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए। दिल्ली से आए असिस्टो टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामकृष्णन ‘रामा’ ने एआई आधारित तकनीकी नवाचारों और बदलते कारोबारी परिदृश्य पर अपने विचार रखे।
अरिव्यम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रौद्योगिकी प्रमुख एवं एआई विशेषज्ञ गगन दीप ने एआई के व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की तकनीकी संभावनाओं पर प्रकाश डाला। जयपुर से आए हैबिलेलैब्स लिमिटेड के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकित धीर ने उद्योग, व्यवसाय और नवोद्यमिता के क्षेत्र में एआई की बढ़ती भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
आगरा से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विभिन्न परिचर्चाओं में स्थानीय अनुभव और व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किए। इनमें टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा के अध्यक्ष एवं क्लार्क्स शिराज के उपाध्यक्ष अमूल्य कक्कड़, जेपी पैलेस होटल एंड कन्वेंशन सेंटर के उपाध्यक्ष हरि सुकुमार, ट्रैवल ब्यूरो आगरा के निदेशक सुयश गुप्ता, प्रेरक वक्ता पूनम सचदेवा, शिक्षाविद एवं सामाजिक उत्तरदायित्व व सतत विकास रणनीतिकार डॉ. बीना लवानिया, पुरवीराज म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक पूजा लूथरा तथा अधिवक्ता, यूवी ओवरसीज की विक्रय निदेशक एवं डांग शूज़ की संस्थापक संजिका डंग शामिल रहीं।
आईसीएसआई आगरा शाखा के अध्यक्ष सीएस अनुज अशोक अग्रवाल, सचिव सीएस नीतू अग्रवाल और सीएस अंचल जैन ने भी विभिन्न परिचर्चाओं में विचार रखे। इन परिचर्चाओं में एआई एवं उद्योग, पर्यटन एवं आतिथ्य, शिक्षा एवं कौशल विकास, महिला उद्यमिता, वित्तीय क्षेत्र, कॉरपोरेट प्रशासन, नवोद्यमिता और भविष्य की कार्यशैली जैसे विषयों पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई अब केवल तकनीकी बदलाव का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि व्यवसाय, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक विकास की दिशा को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बन चुका है।
एआई और रोबोटिक्स के प्रोजेक्ट्स में दिखी युवाओं की प्रतिभा
कॉन्क्लेव में विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स आधारित अत्याधुनिक प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया। विशेष प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने तकनीक, नवाचार और रचनात्मक सोच के माध्यम से विकसित अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इन प्रोजेक्ट्स का विशेषज्ञ ज्यूरी ने विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन किया। मूल्यांकन के आधार पर उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स का चयन प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार तथा ज्यूरी की विशेष पसंद यानी Jury’s Choice श्रेणी में किया गया।
चयनित प्रोजेक्ट्स की टीमों को केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान विद्यार्थियों के तकनीकी नवाचार और उनकी रचनात्मक सोच को मंच मिला।
प्रथम पुरस्कार जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के प्रोजेक्ट “DHRITAM” को दिया गया। द्वितीय पुरस्कार डॉ. एमपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, आगरा के प्रोजेक्ट “DivyaMitra” को मिला। तृतीय पुरस्कार शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के प्रोजेक्ट “Agri Form AI” और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के प्रोजेक्ट “Campus Buddy” को प्रदान किया गया।
ज्यूरी की विशेष पसंद के रूप में तीन प्रोजेक्ट्स को सम्मानित किया गया। इनमें जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का “Project Alpha”, शारदा विश्वविद्यालय, आगरा का “SkillSync” और संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा का “AI Krishi” शामिल रहा।
इन प्रोजेक्ट्स ने यह प्रदर्शित किया कि देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में युवा प्रतिभाएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में नए तथा व्यावहारिक समाधान विकसित कर रही हैं। कृषि, शिक्षा, कौशल विकास और स्मार्ट तकनीकी समाधानों से जुड़े इन नवाचारों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी क्षमता और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया।
रोबोटिक डॉग बना आकर्षण का केंद्र
कॉन्क्लेव की प्रदर्शनी में अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े कई स्टॉल लगाए गए थे। इनमें जीएलए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया गया रोबोटिक डॉग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। एआई और रोबोटिक्स आधारित इस मॉडल को देखने के लिए प्रतिभागियों और आगंतुकों में खासा उत्साह नजर आया।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी प्रदर्शनी का भ्रमण किया और रोबोटिक डॉग का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों के इस नवाचार की सराहना करते हुए युवा प्रतिभाओं को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
IndiaAI Mission ने साझा किया भारत के एआई भविष्य का विजन
भारत सरकार के IndiaAI Mission के निदेशक आईएएस मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने विशेष संबोधन में भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास, विस्तार और समावेशी उपयोग की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने IndiaAI Mission के विजन, रोडमैप और भविष्य की रणनीति साझा करते हुए कहा कि एआई को देश के युवाओं, स्टार्टअप्स, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने भारत की एआई क्षमता को मजबूत करने, स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने, एआई प्रतिभाओं को विकसित करने तथा जिम्मेदार और सुरक्षित एआई इकोसिस्टम के निर्माण की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार भारत अपनी विशाल युवा शक्ति, तकनीकी प्रतिभा और नवाचार क्षमता के बल पर वैश्विक एआई नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
जनप्रतिनिधियों और आयोजकों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में विधायक छोटेलाल वर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, आरएलडी जिलाध्यक्ष गोविन्द शर्मा, रोहित जैन, कुलदीप ठाकुर और योगेश सिंघल प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में डॉ. एमपीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की प्रिंसिपल राखी जैन, काव्य सिंह, विक्रम शास्त्री, सीसीएलए के महासचिव अजय शर्मा, कन्वीनर ब्रजेश शर्मा, मुनेन्द्र बघेल, अविनाश वर्मा और सुहैल यासीन सहित अन्य लोगों की भूमिका रही।
AI FutureReady Conclave 2026 में केंद्रीय मंत्री से लेकर शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, वित्त, विधि, उद्यमिता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों तक ने एआई के बदलते स्वरूप और उसके व्यापक प्रभाव पर विचार रखा। कार्यक्रम में एक ओर एआई को गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाने की आवश्यकता सामने आई, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए एआई और रोबोटिक्स में मौजूद संभावनाओं को प्रदर्शित करने वाले प्रोजेक्ट्स ने यह दिखाया कि नई पीढ़ी तकनीकी बदलाव को अपनाने के साथ उसके नए उपयोग भी तलाश रही है। भारतीय एआई मॉडल, डेटा सुरक्षा, स्वदेशी एआई इकोसिस्टम, युवाओं की तकनीकी क्षमता, स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षा, कृषि और कौशल विकास जैसे विषयों पर हुई चर्चा ने एआई को व्यापक विकास से जोड़ने की दिशा को सामने रखा। कार्यक्रम में प्रदर्शित प्रोजेक्ट्स और विशेषज्ञों की परिचर्चाओं ने तकनीक के व्यावहारिक उपयोग तथा भविष्य की चुनौतियों को भी रेखांकित किया।
