मथुरा: उत्तर प्रदेश में आज साल का पहला चंद्रग्रहण हुआ। शाम 6:48 बजे ग्रहण समाप्त हुआ और करीब 15 मिनट तक लाल चांद दिखाई दिया। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहे, वहीं ग्रहण खत्म होने के बाद राम मंदिर (अयोध्या) और बांके बिहारी मंदिर (मथुरा) में दर्शन-पूजन शुरू कर दिए गए। काशी में दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती में भी सवा घंटे की देरी हुई।
सुबह करीब 9 बजे चंद्रग्रहण शुरू होने से पहले अयोध्या के राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में भोग अर्पित किया गया। वाराणसी, लखनऊ, आगरा, प्रयागराज समेत प्रदेश के अधिकांश शहरों में चंद्रग्रहण दिखाई दिया। मंदिरों को ग्रहण के दौरान बंद कर दिया गया। काशी के दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर शाम की गंगा आरती में देरी हुई। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि आज का ग्रहण 6 बजकर 37 मिनट पर खत्म हुआ, इसलिए आरती का समय बढ़ाकर 7 बजकर 30 मिनट किया गया।
विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी की पूर्ण छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली रोशनी को बिखेर देता है और केवल लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है। इसी कारण पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा लाल या तांबे रंग का दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।
कानपुर में नागेश्वर शिव मंदिर और वाराणसी के संकटमोचन, राम-जानकी मंदिर सहित कई मंदिरों के कपाट ग्रहण के दौरान बंद किए गए थे। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों की सफाई और विधिविधान से पूजा-आरती की गई। भक्तों ने पूजा के बाद दर्शन शुरू किए।
सूतक और ग्रहण के समय बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएं और बच्चे घर में सुरक्षित रहें। इस दौरान मंत्र जप, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण किया गया और भक्तों के लिए दर्शन व्यवस्था बहाल की गई।
