नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर लगातार दूसरे दिन किए गए हवाई हमलों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ने पश्चिम एशिया में हालात को और विस्फोटक बना दिया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है और इजराइल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
तनाव का असर खाड़ी देशों में साफ दिखाई दे रहा है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक ईरानी ड्रोन टकराने से चार लोग घायल हो गए, जबकि अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत की खबर है। इससे एक दिन पहले बुर्ज खलीफा के पास हुए धमाके का वीडियो सामने आया, जिसने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हवाई क्षेत्र बंद होने और सुरक्षा अलर्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर पड़ा है। एयर इंडिया ने 22 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं, जबकि अब तक लगभग 50 उड़ानें निरस्त हो चुकी हैं। नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार सैकड़ों उड़ानों पर असर पड़ सकता है। इंडिगो ने भी 2 मार्च की रात तक कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को स्थगित किया है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और अमृतसर एयरपोर्ट पर यात्री 24 घंटे से अधिक समय से इंतजार कर रहे हैं। केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर भी खाड़ी देशों से आने-जाने वाली 26 उड़ानें रद्द की गई हैं।
दुबई में फंसे भारतीय नागरिकों ने मदद की अपील की है। भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु ने सोशल मीडिया पर बताया कि जिस इलाके में वे ठहरी थीं, उसके पास धमाका हुआ। अभिनेत्री सोनल चौहान ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। इजराइल में 40 हजार से अधिक भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिन्हें पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। ईरान में लगभग 9 से 10 हजार भारतीय, जिनमें अधिकतर कश्मीरी मेडिकल छात्र हैं, फंसे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने उनकी सुरक्षित निकासी की मांग की है।
खामेनेई की मौत के बाद भारत में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। श्रीनगर और लखनऊ में विरोध प्रदर्शन हुए। राजस्थान के अजमेर में शिया मुस्लिम महासभा ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है। संगठन ने इसे मुस्लिम जगत की बड़ी क्षति बताते हुए दुआ और श्रद्धांजलि सभाओं का ऐलान किया है।
इस बीच ईरान ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यदि इसे बंद किया गया तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ता यह संघर्ष अब वैश्विक कूटनीतिक और आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ रहा है।
