आगरा। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के खिलाफ आक्रोश बढ़ते ही जा रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को खेरागढ़ ब्लॉक में ‘टीईटी संघर्ष मोर्चा’ का गठन किया गया और पुरानी पेंशन बहाली के लिए भी जोरदार अभियान शुरू किया गया। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्देश पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, खेरागढ़ ने पथवारी धर्मशाला में भव्य शैक्षिक संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया।

संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि टीईटी परीक्षा के नाम पर शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान हो रहा है। उन्होंने शिक्षकों से अपने अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए संगठन के साथ ‘आरपार की लड़ाई’ लड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कंसाना ने की। मंडलीय मंत्री ओमवीर डागुर, राजेन्द्र त्यागी, मुनेन्द्र सिंह राठौर, राकेश त्यागी, भानवीर सिंह आदि प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

संघ द्वारा टीईटी और पुरानी पेंशन बहाली के लिए गठित संयुक्त संघर्ष मोर्चा का संयोजक रंजीत सिंह चाहर और सह-संयोजक लक्ष्मी नारायण अग्रवाल नियुक्त किए गए। ब्लॉक अध्यक्ष सूरज शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ लड़ाई हर स्तर पर जारी रहेगी।

इस आंदोलन के तहत 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने पैदल मार्च कर टीईटी से मुक्ति की मांग की। टीएफआई (Teacher Federation of India) के बैनर तले प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। आगरा में प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के जिलाध्यक्षों ने जिलाधिकारी प्रतिनिधि तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर बेसिक शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग की। ज्ञापन में प्रमुख रूप से चौधरी सुरजीत सिंह, गीता राठौर, हरिओम यादव, अनीता सिंह, मोहन सिंह चाहर उपस्थित थे।
शिक्षकों की मुख्य मांगों में शामिल है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अनुसार, 27 जुलाई 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने का अनुरोध किया जा रहा है। शिक्षक संघ ने सरकार से आग्रह किया कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए कानून बनाकर उन्हें टीईटी से मुक्त किया जाए।

विशिष्ट बीटीसी प्राथमिक शिक्षक एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरेश चौहान और महामंत्री अजय सिकरवार ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वरिष्ठ एवं अनुभवी शिक्षकों को नवयुवक अभ्यर्थियों के समान परीक्षा में सम्मिलित करना उनके सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक, पृथक परीक्षा व्यवस्था और परीक्षा अवधि बढ़ाकर कार्यदिवस में विशेष अवकाश दिया जाए। ज्ञापन सौंपने में विजय यादव, जयप्रकाश, संजय सिंह तोमर, प्रमोद राठौर और अजय प्रकाश सिंह सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।

