आगरा। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बुधवार से जिले में कड़ी सुरक्षा और व्यापक प्रशासनिक तैयारियों के बीच शुरू हो गई हैं। इस वर्ष जनपद में कुल 1,21,922 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, जिनमें हाईस्कूल के 60,371 और इंटरमीडिएट के 61,551 छात्र-छात्राएं हैं। परीक्षा संचालन के लिए 154 केंद्र बनाए गए हैं, जहां बहुस्तरीय निगरानी और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) चंद्रशेखर ने बताया कि परीक्षा को नकलविहीन, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी केंद्र व्यवस्थापकों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जिले में बनाए गए 154 केंद्रों में से 91 सामान्य, 45 संवेदनशील और 18 अति संवेदनशील श्रेणी में रखे गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 6 जोनल मजिस्ट्रेट, 15 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 172 स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर 5 सचल दल गठित किए गए हैं, जो परीक्षा अवधि में लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर रखेंगे।
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र सुरक्षित रूप से पहुंचाए जा चुके हैं। इन्हें डबल लॉक वाले स्ट्रांग रूम में रखा गया है और स्ट्रांग रूम की निगरानी नाइट विजन कैमरों से की जा रही है। रिजर्व स्ट्रांग रूम की चाबी थाना सब इंस्पेक्टर, केंद्र व्यवस्थापक और स्टेटिक मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित रहेगी। सभी केंद्रों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जा रही है और नियमित रूप से अपडेट लिया जा रहा है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार परीक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। पहली बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की ‘अ’ और ‘ब’ दोनों उत्तरपुस्तिकाओं पर यूनिक कोड की स्टांप लगाई गई है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर निगरानी आसान होगी। कुल 8,16,927 उत्तरपुस्तिकाओं का वितरण कराया गया है।
नकल अध्यादेश 2024 को इस बार सख्ती से लागू किया गया है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर केंद्र व्यवस्थापक के खिलाफ एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। उत्तरपुस्तिकाओं में धनराशि मिलने पर संबंधित कक्ष निरीक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा और इसे नकल की श्रेणी में लिया जाएगा।
परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश व्यवस्था में भी लचीलापन दिया गया है। परीक्षा प्रारंभ होने के आधे घंटे तक परीक्षार्थियों को प्रवेश की अनुमति रहेगी, बशर्ते वे विलंब का उचित कारण बताते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत करें। यदि कोई परीक्षार्थी पहले दिन प्रवेश पत्र लाना भूल जाता है, तो भी उसे परीक्षा में शामिल होने दिया जाएगा। इस बार परीक्षार्थियों को जूते-मोजे उतारने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे उन्हें अनावश्यक असुविधा न हो।
केंद्रों पर बाहरी अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी अधिकृत पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिनकी एक प्रति कंट्रोल रूम में जमा रखी गई है, ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। पहचान पत्र पर एक क्यूआर कोड होगा। इससे अधिकारी अपने मोबाइल से क्यूआर कोड को स्कैन कर कर्मचारी की पहचान कर सकेंगे।
परीक्षा संचालन के लिए 7,015 कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। मंडल में 6 मुख्य संकलन केंद्र बनाए गए हैं, जहां उत्तरपुस्तिकाओं का सुरक्षित संकलन किया जाएगा।
154 परीक्षा केंद्रों में 14 राजकीय विद्यालय, 81 सहायता प्राप्त विद्यालय और 59 वित्तविहीन विद्यालय शामिल हैं। अति संवेदनशील केंद्रों पर एसटीएफ की विशेष निगरानी और जैमर लगाए गए हैं, जिससे किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक नकल की संभावना को समाप्त किया जा सके।
डीआईओएस चंद्रशेखर ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि परीक्षा शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न हो। सभी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने भी विश्वास जताया कि नई व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी के चलते इस वर्ष परीक्षा प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित व छात्रहितैषी बनी है। जिले में व्यापक सुरक्षा और सुदृढ़ व्यवस्थाओं के बीच यूपी बोर्ड परीक्षाएं सुचारु रूप से प्रारंभ हो गई हैं।
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