नई दिल्ली। भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में देश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़े विस्तार के लिए तैयार है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए ₹2,93,030 करोड़ के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। यह राशि हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, माल ढुलाई को सशक्त करने और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर केंद्रित होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारतीय रेलवे के इतिहास में एक निर्णायक कदम बताया।
रेल मंत्री ने बताया कि इस वर्ष के बजट में कुल मिलाकर ₹2.78 लाख करोड़ से अधिक का समर्थन रेलवे को दिया गया है, जिससे रेल अवसंरचना को मजबूत करने, क्षमता बढ़ाने और यात्री सुरक्षा में सुधार पर विशेष जोर रहेगा। सरकार का उद्देश्य रेलवे को आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता का प्रमुख इंजन बनाना है। निरंतर निवेश से माल ढुलाई में सुधार, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, व्यस्त रेल गलियारों में भीड़भाड़ कम करने और आधुनिक ट्रेनों व पुनर्विकसित स्टेशनों के माध्यम से यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
दीर्घकालिक दृष्टि के तहत सरकार ने देश में सात नए उच्च गति रेल गलियारों को ‘विकास संयोजक’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन गलियारों से अंतर-शहर यात्रा समय में भारी कमी आएगी और यात्रियों को तेज, सुरक्षित व सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।
दक्षिण भारत में चेन्नई–बेंगलुरु–हैदराबाद हाई-स्पीड नेटवर्क एक ‘दक्षिणी हाई-स्पीड डायमंड’ का निर्माण करेगा, जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी को सीधा लाभ मिलेगा। रेल मंत्री के अनुसार चेन्नई से बेंगलुरु की यात्रा लगभग 1 घंटा 13 मिनट, बेंगलुरु से हैदराबाद लगभग 2 घंटे और चेन्नई से हैदराबाद लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिमी और मध्य भारत में प्रस्तावित मुंबई–पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा समय घटकर लगभग 48 मिनट रह जाएगा। पुणे से हैदराबाद तक लगभग 1 घंटा 55 मिनट में कनेक्टिविटी संभव होगी, जिससे दक्षिण और पश्चिम भारत के प्रमुख शहर एक निरंतर हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। वहीं उत्तर और पूर्व भारत में दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रा समय घटकर लगभग 3 घंटे 50 मिनट रह जाएगा। इसके साथ ही वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित कॉरिडोर से वाराणसी–सिलीगुड़ी यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी होगी, जिससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच नया आर्थिक गलियारा बनेगा।
रेल मंत्री ने बताया कि ये सातों हाई-स्पीड कॉरिडोर मिलकर लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई के होंगे और इनमें करीब ₹16 लाख करोड़ के निवेश की संभावना है। इससे भारतीय रेलवे भविष्य की परिवहन व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनेगा।
माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने के लिए बजट में पश्चिम बंगाल के डांकुनी से गुजरात के सूरत तक 2,052 किलोमीटर लंबे नए समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर की भी घोषणा की गई है। यह कॉरिडोर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा और मौजूदा पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे पश्चिमी तट के बंदरगाहों तक माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। रेल मंत्री ने बताया कि मौजूदा पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई कॉरिडोर लगभग पूरी क्षमता से संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन करीब 400 मालगाड़ियां चलाई जा रही हैं, इसलिए भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए कॉरिडोर आवश्यक हैं।
रेल मंत्री ने रिकॉर्ड उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि अब तक 35,000 किलोमीटर नई पटरियों का निर्माण, 47,000 किलोमीटर का विद्युतीकरण और ब्रॉडगेज नेटवर्क का 99.5 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण किया जा चुका है। वंदे भारत स्लीपर व चेयर कार ट्रेनें, अमृत भारत और नमो भारत ट्रेनें, साथ ही बड़ी संख्या में नए वैगनों का निर्माण भी तेजी से हो रहा है।
पर्यावरणीय दृष्टि से रेलवे की भूमिका को रेखांकित करते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत कम प्रदूषणकारी है। रिकॉर्ड आवंटन और नई परियोजनाओं के साथ भारतीय रेलवे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में तेज कनेक्टिविटी, कुशल लॉजिस्टिक्स और मजबूत अवसंरचना के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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