मथुरा। ब्रज की ऐतिहासिक लट्ठमार होली गुरुवार को नंदगांव की रंगीली चौक और नंद बाबा मंदिर परिसर में पूरे पारंपरिक उल्लास के साथ खेली गई। सजी-धजी राधारानी की सखियां घूंघट में हाथों में लट्ठ लेकर रंगीली चौक पहुंचीं और बरसाना से आए हुरियारों पर जमकर लाठियां बरसाईं। हुरियारे सिर पर ढाल धारण कर लाठियों के प्रहार से अपना बचाव करते रहे। इस दौरान करीब 11 क्विंटल अबीर-गुलाल उड़ाया गया और पूरा नंदगांव रंगों से सराबोर हो गया। देश-विदेश से लगभग 10 लाख श्रद्धालु और पर्यटक इस अद्भुत परंपरा के साक्षी बनने पहुंचे।

होली खेलने के बाद हुरियारों ने नंद बाबा मंदिर में दर्शन किए। मंदिर के महंतों ने भी उन पर गुलाल बरसाया। रंगीली चौक और मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालु छतों और गलियों में खड़े होकर इस अनोखे उत्सव का आनंद लेते रहे।

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ सूरज पटेल ने बताया कि परिषद और प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक व्यवस्थाएं कीं। तीन मंच बनाए गए और कई स्ट्रीट परफॉर्मेंस ग्रुप लगाए गए। सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समुचित व्यवस्था रही।

बरसाना से आए यतेंद्र तिवारी ने बताया कि द्वापर युग से चली आ रही परंपरा के अनुसार पहले नंदगांव से श्रीकृष्ण के सखा बरसाना होली खेलने जाते हैं और अगले दिन बरसाना के हुरियारे नंदगांव आकर फगुआ मांगते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यशोदा कुंड पर पग बांधे गए, फिर गलियों से होते हुए रंगीली चौक पहुंचे और हंसी-ठिठोली के बाद लट्ठमार होली शुरू हुई।

सखी अनु ने कहा कि आज खूब प्रेम वर्षा हुई। राधा शर्मा ने बताया कि यह उनकी 11वीं होली है और ऐसा लग रहा है जैसे श्रीकृष्ण के साथ होली खेल रही हों। देवेश गोस्वामी ने कहा कि ऐसी होली दुनिया में कहीं नहीं होती। बिहारी शरण गोस्वामी ने परंपरा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि ऐसी होली देखने के लिए देवता भी तरसते हैं।

नंदगांव की बहू खुशी भारद्वाज ने बताया कि यह उनकी पहली होली है और वह पिछले एक महीने से विशेष खानपान लेकर तैयारी कर रही थीं। सोनिया शर्मा और वंदना शर्मा ने भी उत्साह जताया। बाल गोपाल भी सिर पर ढाल धारण कर पहुंचे।
होली से पहले कलाकारों ने रंगीली चौक पर डांस प्रस्तुत किए। सपेरों की बीन की धुन पर कृष्ण रूप में सजी सखियां झूमती रहीं। हुरियारों और सखियों ने पारंपरिक होली गीत गाए—“चंदा छिप मत जइयो आज श्याम संग होली खेलूंगी” और “लहंगा तेरो छींट को ऊपर गोटा लाल…” से पूरा वातावरण गूंज उठा।
इससे पहले 25 फरवरी को बरसाना में लट्ठमार होली खेली गई थी, जहां करीब 20 लाख लोग पहुंचे थे। वहां 20 क्विंटल गुलाल उड़ाया गया और हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा हुई थी। 24 फरवरी को राधारानी (लाड़लीजी) मंदिर में लड्डूमार होली आयोजित हुई थी। ब्रज की यह परंपरा एक बार फिर आस्था, संस्कृति और प्रेम के अद्वितीय संगम के रूप में सामने आई।
