आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक सहयोग के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी विदेशी भाषा विद्यापीठ के विदेशी भाषा विभाग में स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत रूस के प्रतिष्ठित MGIMO विश्वविद्यालय, मॉस्को से चार विद्यार्थियों का दल 16 फरवरी 2026 से आगरा में विशेष शैक्षणिक सत्र के लिए पहुंचा है। यह कार्यक्रम दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत तीन माह तक चलेगा।

रूसी छात्र विश्वविद्यालय परिसर में रहकर हिंदी भाषा, भारतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का अध्ययन करेंगे। पाठ्यक्रम में हिंदी व्याकरण, संवाद-कौशल, भारतीय साहित्य, इतिहास, सांस्कृतिक अध्ययन, भाषाई प्रयोगशाला और लोक-परंपराओं का समावेश है। इसके साथ ही आगरा और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया जाएगा।
वहीं विश्वविद्यालय से तीन भारतीय छात्रों का दल 18 फरवरी 2026 को मॉस्को के लिए रवाना हो चुका है, जहाँ वे MGIMO विश्वविद्यालय में रूसी भाषा और संस्कृति का तीन माह का अध्ययन करेंगे। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण, बहुसांस्कृतिक समझ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की क्षमता प्रदान करना है।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाकर विश्वविद्यालय और देश का गौरव बढ़ाने का आह्वान किया।
विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने इसे अंतरराष्ट्रीय संवाद और सहयोग की सशक्त पहल बताया। विदेशी भाषा विभाग के समन्वयक एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के सचिव डॉ. प्रदीप वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय आने वाले समय में और भी वैश्विक संस्थानों से साझेदारी स्थापित करेगा।
14 जनवरी 2026 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्थित Herzen State Pedagogical University के साथ प्रत्यक्ष वार्ता आयोजित की गई, जिसमें शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
रूसी भाषा के शिक्षक अनुज गर्ग के मार्गदर्शन में संचालित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को बहुभाषिक दक्षता और अंतर-सांस्कृतिक समझ प्रदान कर रहा है।
हिंदी अध्ययन हेतु आगरा आए रूसी छात्र: पावेल आर्मेव, गलिना बकारेवा, जॉर्जी मेलिक्यान, डारिया सर्गेवना।
रूस में अध्ययन हेतु गए भारतीय छात्र: कामरान, प्रशान्त चौधरी, गौरव भट्ट।
यह पहल उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और विद्यार्थियों को संदेश देती है कि वैश्विक मंच पर आगे बढ़ने के लिए भाषा, संस्कृति और ज्ञान का विस्तार अत्यंत आवश्यक है।

