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Agra News : डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में 75 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड थिएटर वर्कशॉप का भव्य शुभारंभ

Students and faculty at the 75-day production-oriented theater workshop inauguration at Dr. Bhimrao Ambedkar University, AgraInauguration of the 75-day production-oriented theater workshop at Dr. Bhimrao Ambedkar University, Agra with students and expert faculty.
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आगरा। डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम में आज माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी के अध्यक्षता में नाट्यावलोकन कला एवं सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 75 दिवसीय प्रोडक्शन ओरिएंटेड थिएटर वर्कशॉप का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। यह वर्कशॉप एक विशेष अवधारणा के साथ आयोजित की जा रही है, जिसमें कला और तकनीक को एक साथ जोड़ा गया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में तनु वेड्स मनु, स्पेशल 26, केसरी जैसी प्रसिद्ध फिल्मों के लेखक–निर्देशक और अष्टपीठ इमोर्टल टॉकीज के डायरेक्टर विरुद्ध उपस्थित रहे। फिल्म अभिनेता आशीष सिंह, जो ज़ीरो और टीवी धारावाहिक पृथ्वीराज में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश, डीन अकादमिक प्रो. मनु प्रताप सिंह, ललित कला संस्थान के उप निदेशक डॉ. मनोज कुमार, नाट्यावलोकन कला संस्था की अध्यक्ष श्वेता चौहान और संरक्षक राजीव चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे।

कुलपति प्रो. आशु रानी ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक थिएटर में अभिनय, चरित्र निर्माण और मंचीय अभिव्यक्ति के महत्व के साथ-साथ आज लाइटिंग डिजाइन, साउंड इंजीनियरिंग, सेट एवं स्टेज क्राफ्ट, विजुअल ट्रीटमेंट और तकनीकी संरचना जैसे आयाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसी बदलती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए फाइन आर्ट्स और इंजीनियरिंग ग्राफिक्स डिजाइन के छात्रों सहित विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को एक साझा मंच पर लाया जा रहा है।

मुख्य अतिथि आशीष सिंह ने अपने संघर्ष और फिल्म जगत के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास और अनुशासन का संदेश दिया। विरुद्ध ने बताया कि आगरा से फिल्म काशी लीला की शुरुआत का उद्देश्य यह है कि आगरा को फिल्म निर्माण का केंद्र बनाया जा सके। इस वर्कशॉप में प्रशिक्षित प्रतिभागियों को भविष्य में फिल्म में काम करने का अवसर मिलेगा।

नाट्यावलोकन कला एवं सांस्कृतिक संस्थान और विश्वविद्यालय के सहयोग से ललित कला संस्थान एवं IET के संयुक्त सहभाग से कार्यशाला की रूपरेखा तैयार की गई है। निदेशक रोहित चौहान ने बताया कि आगामी 75 दिनों में प्रतिभागियों को अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में टेक्निकल डिजाइन, कैरेक्टर मेकिंग, अभिनय, स्टेज क्राफ्ट, सेट एवं प्रोडक्शन डिजाइन जैसे विभिन्न तत्वों पर एकीकृत रूप से कार्य किया जाएगा, ताकि मंचीय प्रस्तुतीकरण कलात्मक संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीक दोनों से समृद्ध हो।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि रंगमंच व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है और यह कार्यशाला विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगी। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. मनु प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में अभिनय, संवाद अदायगी, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, संगीत संयोजन और अंतिम प्रोडक्शन की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

संस्था की अध्यक्ष श्वेता चौहान ने कुलपति का स्वागत करते हुए कहा कि नाट्य कला को देश-विदेश में पुनः प्रफुल्लित करना हमारी प्राथमिकता है। संरक्षक राजीव चतुर्वेदी ने कहा कि रंगमंच को बढ़ावा देने और इसे प्रभावशाली रूप देने के लिए सभी को एक साथ आना होगा। उद्घाटन कार्यक्रम का समन्वय पिंकी सिंह और मंच संचालन मोहित पाराशर तथा संगीत संचालन कुलवंत सिंह ने किया।

उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। यह वर्कशॉप छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित होगी और थिएटर को नई पीढ़ी के दर्शकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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