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Agra News : डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित

ByToday NewsTrack

Feb 18, 2026
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर आधारित एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला “क्रिएटिव माइंड्स, लीगल शील्ड” विषय पर आयोजित हुई, जिसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (CST-UP) द्वारा प्रायोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य संरक्षक विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी रहीं। संरक्षक के रूप में प्रो. मनु प्रताप सिंह (निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, आगरा) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की संयोजक इंजीनियर अंकिता माहेश्वरी (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग) तथा सह-संयोजक सुश्री शिवानी गुप्ता (प्रशासनिक अधिकारी) रहीं।

IPR awareness workshop at Dr. Bhimrao Ambedkar University Agra sponsored by CST-UP

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। इसके उपरांत कुलपति प्रो. आशु रानी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आईपीआर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नए विचारों, शोध और आविष्कारों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है, ताकि कोई भी व्यक्ति दूसरे के कार्य का दुरुपयोग न कर सके।

Expert explaining patent filing process during IPR workshop in Agra


आईपीआर क्या है?

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) वह कानूनी अधिकार है, जो किसी व्यक्ति द्वारा विकसित नए विचार, खोज, डिजाइन, लेख, शोध, ब्रांड या कला को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन जैसे अधिकार शामिल होते हैं। इससे रचनाकार को अपने कार्य का पूरा लाभ प्राप्त होता है।

पेटेंट फाइलिंग की जानकारी

विशेषज्ञ वक्ता सुश्री शबाना खान ने पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति नया आविष्कार करता है, तो वह उसे पेटेंट करवा सकता है। पेटेंट प्राप्त होने के बाद कोई अन्य व्यक्ति उस आविष्कार की नकल नहीं कर सकता।

पेटेंट फाइल करने की मुख्य प्रक्रिया इस प्रकार है—

• अपने आविष्कार की पूरी जानकारी एकत्र करना

• पेटेंट कार्यालय में आवेदन करना

• जांच एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी होना

• स्वीकृति मिलने के बाद पेटेंट प्राप्त करना

उन्होंने बताया कि पेटेंट सामान्यतः 20 वर्षों तक मान्य रहता है।

लीगल शील्ड और कानूनी सुरक्षा

गौरव गोवगिया ने आईपीआर के अंतर्गत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (लीगल शील्ड) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति आपके शोध, उत्पाद या विचार की नकल करता है, तो आईपीआर कानून के माध्यम से उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रेडमार्क की जानकारी

खुशाल जुनेजा ने ट्रेडमार्क और ब्रांड पंजीकरण के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी कंपनी, उत्पाद, लोगो या नाम को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेडमार्क कराया जाता है।

ट्रेडमार्क के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं—

• ब्रांड की पहचान सुरक्षित रहती है

• कोई दूसरा व्यक्ति वही नाम या लोगो इस्तेमाल नहीं कर सकता

• बाजार में विश्वास बढ़ता है

उन्होंने बताया कि शोध-पत्र, उत्पाद और सेवाओं के लिए ट्रेडमार्क अत्यंत उपयोगी होता है।

सहभागिता और लाभ

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से लगभग 75 शिक्षक एवं शोधार्थियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा आईपीआर से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझा।

वक्ताओं ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में नवाचार और शोध ही सफलता की कुंजी हैं। ऐसे में अपने कार्य की सुरक्षा करना आवश्यक है। आईपीआर न केवल रचनात्मक लोगों को संरक्षण प्रदान करता है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनाता है।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार की उपयोगी कार्यशालाओं के आयोजन का आश्वासन दिया, जिससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में डॉ. यू. एन. शुक्ला, डॉ. राजेश लवानिया, डॉ. रेखा शर्मा, डॉ. शालिनी शर्मा, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. शिल्पी लवानिया, इंजीनियर विविपन कुमार, इंजीनियर चंदन कुमार, डॉ. मोनिका अठाना, उदिता तिवारी, डॉ. रत्ना पांडे, इंजीनियर अमोल कुमार तथा डॉ. गिरीश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों एवं शिक्षकों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया तथा भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया।

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