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Agra News: अंतरराष्ट्रीय जियोप्रॉम्प्टिंग कार्यशाला का सफल समापन, एआई नवाचारों पर हुआ मंथन

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आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के विदेशी भाषा विभाग के तत्वावधान में खंदारी परिसर स्थित जे.पी. सभागार में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जियोप्रॉम्प्टिंग कार्यशाला का शुक्रवार को गरिमामय माहौल में समापन हुआ। 

AI prompting session during International GeoPrompting Workshop in Agra

प्रॉम्प्टिंग कौशल एवं उन्नत अनुप्रयोग विषय पर आयोजित यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के अकादमिक इतिहास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई।

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षण, शोध, भाषा अध्ययन, क्षेत्रीय अध्ययन और बहुविषयक अकादमिक क्षेत्रों में एआई के प्रभावी, व्यावहारिक और नैतिक उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि जियोप्रॉम्प्टिंग किस प्रकार पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों को अधिक संवादात्मक और परिणामोन्मुख बना सकती है।

International GeoPrompting Workshop on AI at Dr Bhimrao Ambedkar University Agra

कार्यशाला के दौरान देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने प्रॉम्प्टिंग की मूल अवधारणा, उसकी संरचना और उन्नत अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि सटीक और संदर्भ-आधारित प्रॉम्प्ट्स के माध्यम से एआई से गुणवत्तापूर्ण और विश्लेषणात्मक आउटपुट प्राप्त किया जा सकता है, जो शोध और शिक्षण दोनों के लिए उपयोगी है।

समापन दिवस के प्रातः सत्र में पुदुचेरी से आए एआई विशेषज्ञ अरुणकुमार संथालिंगम ने उन्नत प्रॉम्प्टिंग तकनीकों, इटरेटिव और मेटा-प्रॉम्प्टिंग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि किस तरह असंरचित आंकड़ों को एआई की सहायता से उपयोगी परिणामों में बदला जा सकता है।

इसके बाद फ्रांस से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ निकोलस मार्टिन ने वैश्विक शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में जियोप्रॉम्प्टिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा।

समापन समारोह में कुलपति आशु रानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा और शोध के क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है। इस तरह की कार्यशालाएं शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करती हैं। के-एम-आई के निदेशक प्रदीप श्रीधर ने जियोप्रॉम्प्टिंग को आधुनिक सोच और समस्या समाधान की प्रभावी पद्धति बताया।

प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे एआई के उपयोग को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सभी शैक्षणिक सत्रों के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। विदेशी भाषा विभाग के समन्वयक और कार्यशाला संयोजक प्रदीप वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में देश-विदेश से करीब 145 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह आयोजन ज्ञान, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में एक सफल और प्रभावशाली पहल के रूप में संपन्न हुआ।

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