आगरा। एमजी रोड स्थित होटल हाॅलीडे इन, हरीपर्वत में प्रगति स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0 बाल उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त विकास आयुक्त उमेशमणि त्रिपाठी, प्राचार्य डायट आगरा अनिरुद्ध यादव, एडी बेसिक आगरा चंद्रशेखर और जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय विश्व प्रताप सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

अतिथियों ने बच्चों और शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के विकास में मीना मंच और बाल वाटिका के साथ विद्यालय के शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बालिका शिक्षा के अंतर्गत आयोजित “मेरे बदलाव की कहानी” और कॉमिक्स प्रतियोगिता में जनपदों से चयनित 40 बच्चों में से मण्डल स्तर पर 10 छात्रों-छात्राओं का चयन राज्य स्तर के लिए किया गया। चयनित बच्चों में कु. खनक (उ0प्रा0वि0 नगला शादी जसराना, फिरोजाबाद), कु. रचना (केजीबीवी नौहझील मथुरा), कु. तनु (कम्पोजिट विद्यालय नगला कहरी बेवर मैनपुरी), कु. वर्षा (उप्रावि पानीगांव माॅट मथुरा) और कु. दीक्षा (कम्पोजिट विद्यालय नगला इमली घिरोर मैनपुरी) प्रमुख रहीं। सभी चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और उपहार देकर सम्मानित किया गया।
शेष सभी छात्र-छात्राओं और प्रतिभागियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा जनपदों से आए पूर्व छात्राओं और अभिभावकों का सम्मान भी किया गया। मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक चंद्रशेखर ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास और प्रतिभा को मंच पर लाने में मदद करते हैं और शिक्षकों के उत्साह व योगदान को बढ़ाते हैं। कार्यक्रम का संचालन डायट प्रवक्ता डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय और शिक्षिका किरन यादव ने किया। निर्णायक मंडल की भूमिका जनपदों से आए मास्टर ट्रेनरों ने निभाई जिसमें मण्डल स्तर पर राकेश कुमार (उप निरीक्षक उर्दू), जिला समन्वयक कुलदीप तिवारी, अनुराग कुमार, आनन्द जोशी, डॉ. अरुणेश कुमार और रमेश कुमार पारासर शामिल रहे। समस्त नोडल एसआरजी और मास्टर ट्रेनरों ने बच्चों का मार्गदर्शन किया और प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम ने बच्चों की रचनात्मकता, कहानी लेखन और कॉमिक्स निर्माण की क्षमताओं को प्रोत्साहित किया। मण्डल स्तर पर चयनित छात्र-छात्राओं को राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त होगा। साथ ही, सभी प्रतिभाग करने वाले बच्चों और उनके शिक्षकों को सम्मानित कर उनके प्रयासों और योगदान की मान्यता दी गई। इस तरह बाल उत्सव कार्यक्रम ने बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और शिक्षकों के उत्साह को एक साथ बढ़ावा देने वाला मंच साबित किया।

