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Nazir–Nirala Basant Festival Agra: निराला और नज़ीर जिंदा रहेंगे तो देश के साहित्य की आत्मा बची रहेगी – दीपक कुमार

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निराला नजीर प्रोग्राम में जनकवि नजीर को बसंत पर्व की बेला में किया गया याद

राष्ट्र कवि निराला और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को उनके जन्मदिवस पर भी अर्पित किए श्रद्धासुमन

आगरा। बसंत पर्व की बेला में ताजगंज स्थित शीरोज़ हैंगआउट कैफे में आयोजित निराला–नज़ीर कार्यक्रम में जनकवि नज़ीर अकबराबादी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनके जन्मदिवस पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीपक कुमार, पुलिस आयुक्त आगरा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आगरा की सांस्कृतिक पहचान के रूप में नज़ीर को जाना जाता है। नज़्म और ग़ज़ल जैसी विधाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित हैं और नज़्म को नज़ीर की मौलिक विधा के रूप में व्यापक स्वीकृति मिली है। उन्होंने कहा कि महाप्राण पं. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ छायावाद के कवि होते हुए भी जन की बात कहते हैं। नज़ीर और निराला दोनों ने आम जनमानस की संवेदनाओं को स्वर दिया, इसलिए जब तक नज़ीर और निराला जीवित रहेंगे, देश के साहित्य की आत्मा सुरक्षित रहेगी।

कार्यक्रम में शैलेश शर्मा (डीआईजी, आगरा परिक्षेत्र) और सैयद अली अब्बास (डीसीपी नगर) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस वर्ष बसंत उत्सव में नज़ीर के साथ-साथ निराला और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रचनाओं की सरस और संगीतमय प्रस्तुतियां दी गईं। नज़्म विधा के अन्वेषक के रूप में विख्यात जनकवि नज़ीर की जयंती पर उनकी रचनाओं का पाठ और गायन हुआ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर उनके नेतृत्व में गठित आज़ाद हिंद फ़ौज (आईएनए) के मुख्य तराने “कदम-कदम बढ़ाए जा” की प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं ने जोश-ओ-खरोश के साथ सहभागिता की। उल्लेखनीय है कि यह गीत वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित और कैप्टन राम सिंह ठाकुर द्वारा संगीतबद्ध है तथा आज भी भारतीय सेना के रेजिमेंटल क्विक मार्च की शुरुआत में बजाया जाता है।

निराला जी का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जिला मेदिनीपुर) में माघ शुक्ल वसंत पंचमी को हुआ था। साहित्य जगत उन्हें सिद्धांतों से समझौता न करने वाले साहित्यसेवी के रूप में स्मरण करता है।

कार्यक्रम का आयोजन अमृता विद्या – एजुकेशन फ़ॉर इम्मोर्टालिटी सोसायटी और छांव फ़ाउंडेशन द्वारा किया गया। संगीतमय प्रस्तुतियों के बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, बेगम अख्तर पुरस्कार और उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात गायक सुधीर नारायण ने कहा कि वे वर्षभर देश-विदेश में प्रस्तुतियों के लिए जाते हैं, किंतु बसंत पर्व पर आगरा में रहकर नज़ीर को याद करना उनका विशेष प्रयास रहता है। उन्हें विश्वास है कि प्रकृति उनकी इस इच्छा को आगे भी पूरा करती रहेगी।


उनके साथ ख़ुशी सोनी, हर्षित पाठक, देशदीप शर्मा, सुरेश राजपूत, प्रीति कुमारी, अमन शर्मा, राज मैसी, राजू पांडेय सहित अन्य कलाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कुंदन सोप का सार्थक सहयोग रहा।

प्रस्तुत गीतों में कार्यक्रम की शुरुआत “वर दे वीणा वादिनी” से हुई। इसके बाद निराला की रचना “सखी बसंत आया” (राग रागेश्वरी, एक ताल बारह मात्रा), नज़ीर की रचनाएं “क्या-क्या कहूं मैं कृष्ण कन्हैया का बालपन”, “जब लाद चलेगा बंजारा” (बंजारा नामा), “रख ध्यान सुनो दंडोत करो जय बोलो कृष्ण कन्हैया”, “सबकी तो बसंते हैं पर यारों का बसंता” तथा “हज़रत सलीम चिश्ती – है दो जहां के सुल्तान” प्रस्तुत की गईं।

गत तीन वर्षों से बसंत उत्सव मना रही अमृता विद्या – एजुकेशन फ़ॉर इम्मोर्टालिटी सोसायटी के सचिव अनिल शर्मा ने कहा कि नज़ीर जनकवि थे, जो जनता को हालातों की हकीकत बताते हुए जिंदादिली से जीने की प्रेरणा देते रहे। शीरोज़ हैंगआउट कैफे भी सकारात्मक जीवन का संदेश देने वाला प्रतिष्ठान है। आयोजन के माध्यम से एसिड अटैक पीड़िताओं के संघर्ष और समाज की मुख्यधारा में उनके योगदान को सामने लाया गया। कार्यक्रम के दौरान उनकी मेज़बानी अग्रिम पंक्ति में रखी गई और उपस्थित सुधीजनों ने उनसे संवाद किया।

छांव फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर आशीष शुक्ला ने कहा कि आगरा की साझी विरासत को जीवित रखने में भागीदार बनना गर्व की बात है। ऐसे आयोजन एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए प्रेरणादायक हैं और उनमें साहित्यिक अभिरुचि भी विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि रुकैया नियमित रूप से कविता लिख रही हैं।

इस अवसर पर अमृता विद्या – एजुकेशन फ़ॉर अमरता की ओर से नज़ीर अकबराबादी पर प्रस्तावित फिल्म का प्रोमो भी प्रदर्शित किया गया। अनिल शर्मा ने जानकारी दी कि फिल्म की शूटिंग शीघ्र शुरू होगी। यह बहुभाषी होगी और नज़ीर के विश्वभर में फैले प्रशंसकों की भावनाओं के अनुरूप बनाई जाएगी।

कार्यक्रम में एक प्रस्ताव पारित कर ताजमहल मेट्रो स्टेशन या मलको गली के आसपास के किसी मेट्रो स्टेशन का नाम जनकवि नज़ीर के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया, जिसे शासन और महानगर से जुड़े जनप्रतिनिधियों को प्रेषित किया जाएगा।

तीन घंटे से अधिक समय तक चले इस कार्यक्रम का संचालन दिनेश श्रीवास्तव ने किया। उपस्थित प्रमुख अतिथियों और सुधीजनों में मन्नू, अर्निका माहेश्वरी, विमल सोलंकी, आरिफ तैमूरी, राजीव सक्सेना, असलम सलीमी, ब्रिगेडियर विनोद दत्ता, विधु दत्ता, रुनु सरकार, डॉ. आभा चतुर्वेदी, ग्रुप कैप्टन डॉ. कुंवर जय पाल सिंह चौहान, आशा चौहान, भुवेश शर्मा, परवेज़ कबीर, डॉ. डी.वी. शर्मा, शिव दयाल शर्मा तथा शीरोज़ हैंगआउट कैफे की एसिड अटैक सर्वाइवर्स शामिल रहीं।

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