आगरा। आगरा में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर की गई कार्यवाही की गहन समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों को जनहित से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नवीन सर्किट हाउस सभागार में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की जनपद आगरा एवं मैनपुरी के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता सभापति किरण पाल कश्यप ने की।
बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी आगरा अरविन्द मल्लप्पा बंगारी द्वारा समिति के सदस्यों का स्वागत किया गया। इसके बाद वर्ष 2022 से 2025 के बीच सांसदों, विधान परिषद व विधानसभा सदस्यों द्वारा भेजे गए पत्रों पर की गई कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की गई।
सभापति ने स्पष्ट किया कि सत्ता और विपक्ष दोनों के सदस्यों को शामिल कर गठित यह समिति जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की समस्याओं के समाधान को सुनिश्चित करने के लिए कार्य करती है। समीक्षा के दौरान यह देखा गया कि किस तिथि को पत्र प्राप्त हुआ और उस पर किस तिथि को कार्यवाही कर संबंधित जनप्रतिनिधि को अवगत कराया गया।
बैठक में मैनपुरी के अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी, डीएफओ तथा जिला पूर्ति अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर स्पष्टीकरण तलब करते हुए 10 दिन में विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। वहीं आगरा के जिला विद्यालय निरीक्षक और जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता के अनुपस्थित रहने पर भी समिति ने नाराजगी जताई और समयबद्ध रिपोर्ट मांगी।
सभापति ने निर्देश दिए कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के पत्रों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए और प्रत्येक मामले में लिखित उत्तर अनिवार्य रूप से भेजा जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही अक्षम्य है।
बैठक में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि के समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग पर बल दिया गया। गोशालाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए निराश्रित गोवंश संरक्षण को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए ताकि किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें।
सभापति ने यह भी कहा कि अंत्योदय राशन कार्ड केवल पात्र लाभार्थियों को ही वितरित किए जाएं और सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। उन्होंने दो टूक कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई दे।
बैठक में पंचायत राज, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, पुलिस, पर्यावरण, लोक निर्माण, डूडा, भूतत्व एवं खनिजकर्म, सहकारिता, समाज कल्याण, आयुष सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने समिति को आश्वस्त किया कि दिए गए सभी निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया जाएगा।
साथ ही सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि शिलापट्टिकाओं पर जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित किए जाएं और प्रत्येक कार्यालय में जनप्रतिनिधियों के पत्र, शिकायत और सिफारिशों का पृथक रजिस्टर रखा जाए।
बैठक में बताया गया कि आगरा जनपद में जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए कुल प्रकरणों में विद्युत विभाग के 230 मामले सर्वाधिक हैं, जबकि पुलिस विभाग के 119, नगर विकास के 71, पंचायती राज के 55, पीडब्ल्यूडी के 38 सहित अन्य विभागों के सैकड़ों मामलों पर कार्यवाही की गई है। सभी प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण की जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों को दी जा चुकी है।
बैठक में जिलाधिकारी आगरा, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, अपर जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला, अपर जिलाधिकारी न्यायिक, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे जुबेर बेग, मुख्य चिकित्साधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव सहित आगरा व मैनपुरी के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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