संभल। प्रयागराज से प्रारंभ हुई भारतीय सनातन संपर्क यात्रा का प्रथम चरण श्री कल्कि धाम, संभल में यज्ञ के साथ संपन्न हुआ। अमेरिका के लास वेगास निवासी एनआरआई संत स्वामी अनल, माता मधु एवं उनके सहयोगियों द्वारा निकाली गई इस यात्रा का समापन श्री कल्कि पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की उपस्थिति में हुआ। यात्रा के 93वें दिन आयोजित इस कार्यक्रम में 103वें यज्ञ में स्वयं आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्वामी अनल के साथ आहुति अर्पित की।
यात्रा संयोजक डॉ. दिवाकर तिवारी ने बताया कि इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में गांव-गांव और कस्बों के मंदिरों में यज्ञ आयोजित किए गए। इस दौरान सनातनी परिवारों से संवाद कर सनातन विचारों, परंपराओं और उनकी महत्ता पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि स्वामी अनल अमेरिकन हिंदू एसोसिएशन के माध्यम से अमेरिका सहित कई देशों में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े हैं और इसी उद्देश्य से भारत यात्रा पर आए हैं।
स्वागत अवसर पर श्री कल्कि पीठ द्वारा “संभल का इतिहास और सनातन का भविष्य” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसे समाज के प्रबुद्ध मनीषियों, इतिहासकारों और विद्वानों ने संबोधित किया। गोष्ठी में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्री कल्कि धाम का शिलान्यास करते समय प्रधानमंत्री द्वारा यह कहा गया था कि यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भविष्य में सनातन धर्म का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि स्वामी अनल द्वारा अमेरिका की धरती पर लिया गया संकल्प और उनका श्री कल्कि धाम में आकर यात्रा का समापन होना दैवीय संयोग और इस पावन भूमि की कृपा को दर्शाता है।
इस अवसर पर आचार्य प्रमोद कृष्णम की अध्यक्षता में पांच प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें गौ माता के वध पर संपूर्ण राष्ट्र में प्रतिबंध, पूर्व में हिंदू से मुसलमान बने सनातनियों को पुनः सनातन समाज में सम्मानपूर्वक वापस लेना, जातिवाद से ऊपर उठकर स्वयं को केवल सनातनी के रूप में पहचान देना, आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए मंदिरों को उनके पूर्व स्वरूप में लाना तथा इन विषयों पर देशभर के गांवों, कस्बों और शहरों में गोष्ठी व सम्मेलन आयोजित करना शामिल है। प्रस्तावों के समर्थन में उपस्थित जनसमूह ने भारत माता की जय के नारों के साथ अपनी सहमति व्यक्त की।
कार्यक्रम में आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा स्वामी अनल, माता मधु, इतिहासकार विग्नेश त्यागी, यूट्यूबर गौतम खट्टर एवं अन्य विद्वतजनों का स्वागत किया गया। वहीं डॉ. दिवाकर तिवारी, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, विमल जैन, अशोक त्रिपाठी, दुष्यंत शास्त्री, राजेश सिंघल और रामकिशोर त्यागी ने आचार्य प्रमोद कृष्णम का शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
कार्यक्रम के निवेदक डॉ. दिवाकर तिवारी, कार्यक्रम संयोजक, समन्वयक रामायण रिसर्च काउंसिल उत्तर प्रदेश, संयोजक सनातन रक्षा ट्रस्ट तथा महामंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने इसे सनातन चेतना को संगठित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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