आगरा। साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक चेतना के निरंतर प्रसार को समर्पित संस्था साहित्य संगीत संगम का 43वां वार्षिक समारोह चेतना इंडिया के सहयोग से ग्रैंड होटल सभागार में भव्य और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के तत्वावधान में संचालित विश्वविद्यालय सामुदायिक रेडियो 90.4 ‘आगरा की आवाज’ की सक्रिय रेडियो पार्टनरशिप में संपन्न हुआ।
रेडियो ‘आगरा की आवाज’ की अहम भूमिका
विश्वविद्यालय सामुदायिक रेडियो ‘आगरा की आवाज’ की टीम ने कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार, जनसंपर्क और सुव्यवस्थित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेडियो के माध्यम से कार्यक्रम की पूर्व सूचनाओं, साक्षात्कारों और लाइव कवरेज ने आयोजन को जन-जन तक पहुंचाया।
सांस्कृतिक परंपरा के साथ हुआ शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। सरस्वती वंदना कुमारी पूजा तोमर ने प्रस्तुत की, जबकि गणेश वंदना पर मनमोहक नृत्य कुमारी नंदन द्वारा प्रस्तुत किया गया।
संस्था के 43 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश
संस्था एवं उसकी संस्थापिका संतोष सक्सेना का परिचय सुभाष सक्सेना ने दिया। वक्ताओं ने संस्था के 43 वर्षों के साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए इसे नवोदित और वरिष्ठ प्रतिभाओं के लिए सशक्त मंच बताया।
18 विशिष्ट प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में साहित्य, कला, संगीत, पत्रकारिता, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और चिकित्सा जैसे विविध क्षेत्रों की 18 विशिष्ट प्रतिभाओं को स्मृति सम्मान, साधना सम्मान और प्रतिभा प्रशस्ति सम्मान से अलंकृत किया गया।
इन विभूतियों को मिला सम्मान
सम्मान पाने वालों में साहित्यकार डॉ. रमा रश्मि, चेन्नई के वरिष्ठ कवि ईश्वर करुण, भरतनाट्यम कलाकार एवं नृत्य निर्देशिका आरती हरि प्रसाद, वरिष्ठ स्वर साधिका प्रो. वंदना सिंह, मनोवैज्ञानिक चिकित्सक प्रतिमा शाही, लोक कलाकार अरुण रावल, दिव्यांग बच्चों की मानसिक चिकित्सक रेनू रावत तिवारी, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत अनुराधा शर्मा, बाल साहित्यकार एवं संपादक लाल देवेंद्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी, समाजसेवी मनीष राय, वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र, शिक्षक हरे कृष्ण गुप्त, हास्य-व्यंग्यकार एवं बाल साहित्यकार अजीत सिंह राठौर ‘लुल्ल कानपुरी’, समाजसेवी मनोज मिश्रा, लोक कलाकार एवं पत्रकार दिनेश शर्मा, कीबोर्ड वादक वीरेंद्र भान गुप्ता ‘चुन्ना’ तथा युवा कवयित्री भारती शर्मा शामिल रहीं।
सांस्कृतिक प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र
सांस्कृतिक सत्र में सुशील सरित के व्यंग्य गीत ‘जय जय जुगाड़ बाजी’ की नाट्य शैली में प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। साहित्य और संस्कृति से जुड़े विचारों और प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।
संचालन और समापन
समारोह का संचालन दिनेश श्रीवास्तव, नीरज स्वरूप और नीलेन्द्र श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से किया। समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र मिलन द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और संस्कृति प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।


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