जांच के दौरान सीटी एंजियोग्राफी में सामने आया कि हाथ की टूटी हुई हड्डी (सुप्राकॉन्डायलर फ्रैक्चर) के कारण दाहिनी भुजा की मुख्य रक्त नली ब्रैकियल आर्टरी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे हाथ में रक्त प्रवाह पूरी तरह बंद हो चुका था। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते इलाज न होने पर हाथ में गैंग्रीन फैलने और हाथ काटने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएनएमसी के ऑर्थोपेडिक्स और सीटीवीएस विभाग की संयुक्त टीम ने तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया। सबसे पहले ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल के नेतृत्व में टूटी हुई हड्डी को सफलतापूर्वक फिक्स किया गया। इसके बाद सीटीवीएस सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने बच्चे की क्षतिग्रस्त ब्रैकियल आर्टरी को उसके ही पैर से निकाली गई नस (सैफेनस वेन) से जोड़कर नई रक्त नली का निर्माण किया।
दोनों सर्जरी सफल रहीं। ऑपरेशन के बाद बच्चे के हाथ में दोबारा रक्त प्रवाह शुरू हो गया, दर्द से राहत मिली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हाथ कटने से बच गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में रक्त नलियां बेहद छोटी होती हैं, ऐसे में इस तरह की सर्जरी तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल मानी जाती है।
एसएनएमसी की ऑर्थोपेडिक्स और सीटीवीएस टीम के समन्वय और दक्षता से यह जटिल ऑपरेशन सफल हो सका, जो आगरा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
 |
| डॉ सुशील सिंघल |
ऑपरेशन टीम में ऑर्थोपेडिक्स विभाग से डॉ. अमृत गोयल, डॉ. मयूर सहित टीम, सीटीवीएस विभाग से डॉ. सुशील सिंघल और डॉ. अनुज गर्ग, जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रभा, डॉ. शाहिद और डॉ. अनुकृति शामिल रहीं।
 |
| डॉ अमृत गोयल |
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि अब इस तरह की जटिल और अत्याधुनिक सर्जरी आगरा में ही उपलब्ध है। मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
#SNMedicalCollege #AgraNews #ChildHealth #ComplexSurgery #MedicalBreakthrough #VascularSurgery