फतेहाबाद। फतेहाबाद क्षेत्र में दिन रात हरे पेड़ों पर आरी चलाकर कटान धड़ल्ले से हो रहा है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बिना परमिशन कटान पर जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रही है।
तहसील क्षेत्र में लकड़ी माफिया सक्रिय हैं। इनकी मनमानी के आगे जिम्मेदार बेबस नजर आ रहे हैं। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर्यावरण को लेकर संजीदा है और पौधारोपण के जरिये हरियाली को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। लकड़ी के ठेकेदार हरियाली को नष्ट करने पर उतारू हैं। फतेहाबाद क्षेत्र में इन दिनों हरे-भरे नीम, बबूल, शीशम के पेड़ों पर धड़ल्ले से आरी चलाई जा रही है।
ताजा मामला गांव गुबरौठ का है जहां हरे नीम ,बबूल आदि के पेड़ों को आरी चलाकर धराशाई किया गया है, जिसके कटे हुए पेड़ों के निशान और बचे हुए अवशेषों के दो वीडियो 37 सेकेंड और 23 सेकेंड के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए पौधरोपण कराया तो जाता है, लेकिन पेड़ों की कटान पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वन विभाग की उदासीनता के चलते वन माफिया के हौसले बुलंद हैं। वन विभाग की कार्रवाई इनके लिए नाकाफी साबित हो रही है।
पूर्व में भी कस्बा फतेहाबाद,पारोली सिकरवार, निबोहरा सहित अन्य क्षेत्र में हरे पेड़ों पर आरी चलाने के मामले प्रकाश में आए थे वन विभाग ने कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की इसके चलते इनके हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को सूचना देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इसलिए हरे पेड़ों का कटान नहीं रुक रहा है। वन विभाग सरकार के वन संरक्षण अभियान को पलीता लगाता नजर आ रहा है। बड़ा सवाल बना हुआ कि वन माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही होती या ऐसी ही कटान जारी रहेगा।
वन क्षेत्राधिकारी विशाल राठौर से बात करने पर बताया कि मामला संज्ञान में आया है जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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