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Bihar Election 2025: बिहार में विकास बनाम वादों की जंग, एनडीए का घोषणापत्र आज: एक करोड़ रोजगार, 10 रुपये में भोजन और उद्योग क्रांति का वादा

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आज शुक्रवार को एनडीए गठबंधन अपना घोषणापत्र जारी करने जा रहा है। राजधानी पटना के होटल मौर्या में होने वाले इस कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गठबंधन के तमाम प्रमुख नेता शामिल रहेंगे। इस घोषणापत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के विकास पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है।

NDA Bihar Manifesto 2025 launch by JP Nadda and Nitish Kumar at Hotel Maurya Patna

एक करोड़ रोजगार और सस्ती थाली की घोषणा संभव

सूत्रों के मुताबिक, एनडीए के घोषणापत्र में युवाओं को आकर्षित करने के लिए पांच साल में एक करोड़ रोजगार देने का बड़ा वादा किया जा सकता है। साथ ही “सीता रसोई योजना” के तहत जरूरतमंदों को 10 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की योजना शामिल होगी। यह व्यवस्था पूरे राज्य में सामुदायिक रसोईघरों के माध्यम से लागू की जाएगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस
घोषणापत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की जाएगी। प्रत्येक अनुमंडल में कला, वाणिज्य और कानून संकाय के कॉलेज खोले जाएंगे, जिनमें निःशुल्क छात्रावास की सुविधा होगी। वहीं हर जिले में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और जेनरिक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही जाएगी। शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए “समान काम, समान वेतन” का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा।

औद्योगिक विकास पर बड़ा दांव
एनडीए का फोकस इस बार उद्योगों पर रहने वाला है। बिहार में आईटी पार्क, इकोनॉमिक जोन और सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की स्थापना की योजना प्रस्तावित है। साथ ही डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और पैकेजिंग यूनिट के जरिये युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने की दिशा में काम होगा।
सरकार छोटे उद्यमियों को पहचानकर उन्हें ऋण उपलब्ध कराने और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान करने की बात करेगी। एनडीए का लक्ष्य है कि राज्य में निवेश आकर्षित कर औद्योगिक क्रांति जैसी स्थिति पैदा की जाए।

कला, पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा
स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और परंपरागत उत्पादों को पहचान देने के लिए एनडीए हर प्रखंड में हस्तकला बाजार स्थापित करने का प्रस्ताव रखेगा। पर्यटन स्थलों पर स्थानीय व्यंजनों के सरकारी स्टॉल लगाए जाएंगे, ताकि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को सहारा मिल सके।

बीजेपी ने जनता से मांगे थे सुझाव
इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले भाजपा ने सुझाव आपका, संकल्प हमारा” अभियान चलाया था। 5 से 20 अक्टूबर तक चले इस कार्यक्रम में पार्टी ने पूरे राज्य में लगभग एक करोड़ लोगों से सुझाव एकत्र किए। 243 विधानसभा क्षेत्रों में 3,000 से ज्यादा सुझाव पेटियां लगाई गई थीं।

महागठबंधन का तेजस्वी प्रण: हर घर एक नौकरी और ₹2,500 मासिक सहायता का वादा

एनडीए के घोषणापत्र से पहले महागठबंधन ने अपना घोषणापत्र तेजस्वी का प्रण” जारी कर दिया है। इस 32 पन्नों के मेनिफेस्टो में युवाओं, महिलाओं, किसानों और संविदा कर्मियों को साधने की कोशिश की गई है।

Tejashwi Yadav releases Mahagathbandhan manifesto with 2.8 crore job promise

तेजस्वी यादव ने 2020 के चुनाव में 10 लाख नौकरियों का वादा किया था, लेकिन इस बार उन्होंने दावा किया है कि आने वाले 20 महीनों में हर घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अनुमान के मुताबिक, यह संख्या लगभग 2.8 करोड़ रोजगारों के बराबर होगी।

महिलाओं के लिए ‘माई बहन मान योजना’
महागठबंधन ने महिलाओं को साधने के लिए “माई बहन मान योजना” का एलान किया है, जिसके तहत हर महिला को ₹2,500 प्रति माह और ₹30,000 वार्षिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, हर अनुमंडल में महिला कॉलेज और 136 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की योजना भी शामिल है।

संविदा कर्मियों और शिक्षकों के लिए राहत
घोषणापत्र में संविदा कर्मियों को स्थायी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने और वेतन असमानता दूर करने का वादा किया गया है। इसके अलावा शिक्षकों को गृह जिले से 70 किमी के भीतर ट्रांसफर सुविधा और नियमित प्रमोशन नीति लागू करने की बात कही गई है।

किसानों और अति पिछड़ों पर फोकस
महागठबंधन ने किसानों को राहत देने के लिए हर फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और मंडी व्यवस्था बहाल करने का संकल्प लिया है। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा है कि अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम” पारित कर आबादी के अनुपात में आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

जनता किस वादे पर करेगी भरोसा?

बिहार में अब घोषणापत्रों की जंग तेज हो गई है। एनडीए जहां उद्योग, रोजगार और गरीबों के सस्ते भोजन पर फोकस कर रहा है, वहीं महागठबंधन युवाओं, महिलाओं और संविदा कर्मियों के भरोसे मैदान में उतरा है।
अब सवाल यही है कि जनता किस वादे पर भरोसा करेगी एक करोड़ नौकरियां” का वादा या हर घर एक नौकरी का दावा? 

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