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Agra Fire News: आगरा हादसा: चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी से उठी चिंगारी की आग ने छीन ली बुजुर्ग दंपति की जिंदगी

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आगरा। मंगलवार तड़के आगरा शहर के जगदीशपुरा क्षेत्र के लक्ष्मी नगर मोहल्ले में बड़ा हादसा हो गया। एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग पर लगी थी, तभी अचानक उसमें शॉर्ट सर्किट हो गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग इतनी तेज़ थी कि पास ही कमरे में सो रहे बुजुर्ग दंपति उसकी चपेट में आ गए। दोनों जिंदा जल गए। यह दर्दनाक हादसा तड़के करीब साढ़े तीन बजे हुआ। बुजुर्ग दंपती के बेटे और उसका परिवार मकान की पहली मंजिल पर सो रहे थे। जब उन्होंने माता-पिता की चीखें सुनीं तो नीचे की ओर दौड़े, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कोई भी पास नहीं जा सका।

Fire accident in Agra’s Jagdishpura where elderly couple died
चार्जिंग के दौरान आग लगने से जलकर खाक हुई स्कूटी

स्कूटी चार्जिंग पर लगी थी, शॉर्ट सर्किट से फैल गई आग

लक्ष्मी नगर निवासी 90 वर्षीय भगवती प्रसाद और उनकी पत्नी 85 वर्षीय उर्मिला देवी अपने मकान के नीचे वाले हिस्से में रहते थे। उनके बेटे प्रमोद अग्रवाल परिवार सहित ऊपरी मंजिल पर रहते हैं। प्रमोद किराने का कारोबार करते हैं और रोज़ की तरह सोमवार रात को उन्होंने अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी घर के नीचे चार्जिंग में लगा दी थी।मंगलवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे अचानक स्कूटी में शॉर्ट सर्किट हो गया। तेज़ चिंगारियों के साथ आग फैलनी शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में पूरा कमरा धधक उठा। कमरे में सो रहे बुजुर्ग दंपती संभल भी नहीं पाए और आग की लपटों में घिर गए।

बचने की कोशिश में चीखते रहे दंपति

बुजुर्ग दंपति भगवती प्रसाद और उर्मिला देवी कमरे में सो रहे थे। जैसे ही आग फैली, वे उठे और बचने के लिए शोर मचाने लगे। उनकी चीखें सुनकर ऊपरी मंजिल पर सो रहे बेटे-बहू और बच्चे जाग गए। वे लोग सीढ़ियों से नीचे आने की कोशिश करने लगे, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कोई नीचे नहीं उतर सका।दंपति मदद के लिए लगातार चिल्लाते रहे, लेकिन आग की लपटों और धुएं ने उन्हें घेर लिया। बाहर से मोहल्ले के लोग भी चीखें सुनकर दौड़े, पर किसी की हिम्मत अंदर जाने की नहीं हुई।

पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड को दी सूचना

जैसे ही लोगों ने आग देखी, तुरंत फायर ब्रिगेड को फोन किया गया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दमकलकर्मियों ने जब अंदर जाकर देखा तो भगवती प्रसाद बुरी तरह जल चुके थे और उनकी मौत हो चुकी थी। उनकी पत्नी उर्मिला देवी भी गंभीर रूप से झुलस गई थीं। तुरंत उन्हें बाहर निकाला गया और एंबुलेंस से एसएन मेडिकल कॉलेज भेजा गया। वहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उन्हें भी मृत घोषित कर दिया।

ऊपर फंसा रहा बेटे का परिवार 

हादसे के समय बेटे प्रमोद अग्रवाल का परिवार घर की पहली मंजिल पर सो रहा था। चीखें सुनते ही वे नीचे दौड़े, लेकिन आग ने सीढ़ियों और कमरे को घेर लिया था। तेज धुआं और लपटों के कारण कोई नीचे नहीं जा पाया।परिवार के लोग ऊपर से माता-पिता को आवाज़ लगाते रहे, लेकिन कुछ नहीं कर सके। उन्होंने पड़ोसियों के साथ मिलकर पानी डालने और आग बुझाने की कोशिश की। इस बीच मोहल्ले के लोग भी बाल्टी और पाइप से पानी डालते रहे। कुछ देर में दमकल पहुंची और आग पर काबू पाया गया। लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था।

मोहल्ले में पसरा मातम

हादसे की खबर पूरे इलाके में फैल गई। सुबह होते-होते मोहल्ले में लोगों की भीड़ लग गई। सभी की आंखें नम थीं। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि भगवती प्रसाद और उर्मिला देवी बेहद मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति के थे। मोहल्ले में हर कोई उन्हें अपने बुजुर्ग की तरह मानता था। उनकी मौत से पूरे इलाके में गहरा शोक फैल गया।परिवार के लोग भी गहरे सदमे में हैं। बेटे प्रमोद अग्रवाल की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।हादसे की सूचना मिलने पर जगदीशपुरा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह इलेक्ट्रिक स्कूटी का शॉर्ट सर्किट लग रहा है। हादसे में भगवती प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि उर्मिला देवी को गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।पुलिस ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि यह आग शॉर्ट सर्किट से ही लगी है। फिलहाल आगे की जांच जारी है।

रातभर चार्जिंग पर लगाना खतरनाक हो सकता है

इस हादसे के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आगरा सहित देशभर में कई बार इलेक्ट्रिक स्कूटी और बाइक चार्जिंग के दौरान आग पकड़ चुकी हैं। गर्मी और बैटरी ओवरचार्जिंग के चलते हादसे की आशंका बनी रहती है।एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन को चार्जिंग करते समय हमेशा सतर्क रहें। रातभर चार्जिंग पर लगाना खतरनाक हो सकता है। साथ ही, चार्जिंग पॉइंट को सुरक्षित और वेंटिलेशन वाली जगह पर रखना चाहिए।

जीवन भर का दर्द दे गई चैन की रात

मंगलवार की सुबह प्रमोद अग्रवाल और उनके परिवार के लिए हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन गई। रात को चैन से सोए थे, सुबह होते ही माता-पिता को खो दिया। बेटे और बहू ने माता-पिता की चीखें सुनीं, लेकिन उनकी मदद न कर पाने का दर्द उन्हें जीवनभर सताएगा।पूरा परिवार इस हादसे से टूट गया है। मोहल्ले में हर कोई इस घटना को लेकर दुखी है और लोग परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे हैं।हादसे के बाद मोहल्ले में दहशत का माहौल है। लोग अब चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर और ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कई परिवारों ने अपने घरों में लगे चार्जिंग प्वाइंट्स को दोबारा चेक कराया।

 कुछ दिन पहले ही बेचा था मकान

 कुछ दिन पहले बेचा गया मकान मंगलवार सुबह हादसे का शिकार बन गया। क्षेत्रीय पार्षद अमित पटेल ने बताया कि यह घटना एक 40 गज के दो मंजिला मकान में हुई। नीचे के फ्लोर पर भगवती प्रसाद (90) और उनकी पत्नी उर्मिला देवी (85) रहते थे। भगवती प्रसाद के तीन बेटे हैं। एक मथुरा में, दूसरा बिचपुरी में, जबकि तीसरे बेटे प्रमोद अग्रवाल अपने परिवार के साथ मकान की ऊपरी मंजिल पर रहते हैं। प्रमोद का किराना व्यवसाय मकान के पास ही है।

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले मकान बेचा गया था और परिवार को इसे खाली करना था। सोमवार की रात, प्रमोद की 14 वर्षीय बेटी काकुल अपने दादा-दादी के साथ नीचे सो रही थी। कमरे में इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग पर लगी हुई थी। तड़के करीब 4 बजे शॉर्ट सर्किट के कारण स्कूटी की बैटरी फट गई और आग फैल गई।

दादा भगवती प्रसाद ने तुरंत काकुल को जगाया, और वह ऊपर दौड़कर अपने माता-पिता को उठाने गई। काकुल ने बताया कि कुछ ही सेकेंड में आग पूरे कमरे में फैल गई। जब तक वे अपने माता-पिता को लेकर नीचे पहुंचे, कमरा पूरी तरह जल चुका था।

 छत से पानी डालकर आग बुझाने की कर रहे थे कोशिश

आग लगते ही बुजुर्ग दंपति कमरे में फंसे रहे। वे मेन गेट का दरवाजा खोल नहीं पाए। प्रमोद और उनका परिवार छत से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश करने लगे, लेकिन आग इतनी तेज थी कि वे नीचे नहीं उतर पाए। परिवार केवल पानी डालने और शोर मचाने तक ही सीमित रह गया।

 फायर  ब्रिगेड ने पाया आग पर काबू

शोर सुनकर पड़ोसियों ने मदद के लिए दौड़ा, लेकिन कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिससे कोई अंदर नहीं जा सका। मोहल्ले के लोग आग बुझाने में जुटे रहे, लेकिन आग की तीव्रता बहुत अधिक थी। अंततः फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। करीब आधे घंटे बाद दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

आग बुझने के बाद बुजुर्ग दंपति जले हुए हालत में पाए गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इंस्पेक्टर जगदीशपुरा प्रदीप कुमार ने बताया कि भगवती प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई। उर्मिला देवी को गंभीर हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

पड़ोसियों और परिवार के अनुसार, यह हादसा इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान बैटरी फटने से हुआ। घटना ने पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मचा दी।

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तेज धमाके से हिल गया प्रेम नगर, सास-बहू घायल; परिवार सदमे में

आगरा। शहर के शमसाबाद रोड स्थित प्रेम नगर मोहल्ला मंगलवार की रात एक के बाद एक हुए दो धमाकों से दहल गया। धमाकों की तीव्रता इतनी थी कि घर के लोहे का मेन गेट उखड़कर गली में गिर गया और घर के सामने खड़ी कार तक हिल गई।


क्षेत्रीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, धमाके 67 वर्षीय भानु प्रताप सिंह के घर में हुए। उनके बेटे राजेश तोमर ट्रैवल एजेंसी में गाड़ी चलाते हैं। घटना के समय घर पर केवल भानु प्रताप की पत्नी जानकी और बहू साधना मौजूद थीं।जानकारी मिली है कि राजेश का बेटा मनोज और बेटी दीक्षा किसी काम से बाहर गए थे। जानकी बेसमेंट में और साधना पहली मंजिल पर थीं। अचानक हुए विस्फोट से मोहल्ले के लोगों के कान सुन्न पड़ गए।

सुबाश शर्मा, जो धमाके वाले घर से लगभग 20 मीटर दूर रहते हैं, ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि कमरे के टीवी तक हिल गए। उन्होंने कहा, “ऐसा लगा जैसे कोई मकान ब्लास्ट से ढह गया हो। मैं दौड़कर बाहर निकला और घर की तरफ भागा, वहां चीख-पुकार मची हुई थी।धमाके के बाद घर से धुआं उठता दिखा। आग लग गई और मोहल्ले के लोग राहत कार्य में जुट गए। छत से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की गई। इसी दौरान साधना जख्मी हालत में पड़ोसी की छत पर मिली। वह पहली मंजिल से उछलकर पड़ोसी के घर में जा गिरी थी।

बेसमेंट में जानकी जख्मी हालत में मिलीं। दोनों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही घर के सामान अस्त-व्यस्त हो गए और कमरे के दरवाजे उखड़ गए।राजेश की भतीजी मानसी ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर से लौटी थी। जब तेज धमाका हुआ तो वह तुरंत ताऊजी के घर पहुंची। वहां उसने देखा कि ताईजी बगल की छत पर गिर गई थीं और दादी जली हुई थीं।

भानु प्रताप के घर में बेसमेंट में एक कमरा था, जिसमें वे खाना बनाती थीं। इस कमरे में गैस सिलेंडर और चूल्हा रखा हुआ था। सिलेंडर में गैस भर जाने के कारण जैसे ही जानकी ने लाइट का स्विच ऑन किया, आग लग गई और विस्फोट हुआ। बेसमेंट में कोई खिड़की नहीं होने से गैस बाहर नहीं निकल पाई।

धमाके से ग्राउंड फ्लोर की सीढ़ियों पर लगी स्टील की रेलिंग उखड़ गई। पहली मंजिल के टट्टर पर रखी चारपाई दूसरी मंजिल के टट्टर पर जा फंसी। दूसरी मंजिल का टट्टर भी टूट गया। स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने आग बुझाने और जख्मी महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। साधना और जानकी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इंस्पेक्टर सदर विजय विक्रम सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में आग बेसमेंट में गैस सिलेंडर और चूल्हे के कारण लगी। चूल्हा खुला रह जाने के कारण गैस भर गई थी। जैसे ही लाइट का स्विच ऑन किया गया, विस्फोट हुआ और आग फैल गई।मोहल्ले के लोग और परिवार के सदस्य घटना से सदमे में हैं। पड़ोसियों का कहना है कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया।राजेश तोमर ने बताया कि वह हादसे के समय उदयपुर में थे। उन्हें 15 सितंबर की रात इस घटना की जानकारी मिली। इसके बाद 16 सितंबर को वह आगरा पहुंचे और अस्पताल में जख्मी पत्नी और मां का हाल जाना।मोहल्ले और प्रशासन ने मिलकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और आग बुझाने तथा जख्मी महिलाओं को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए। पुलिस फिलहाल घटना की पूर्ण जांच में जुटी हुई है।

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