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Agra News: एसएन मेडिकल कॉलेज में बिना चीर-फाड़ के दिल के सिकुड़े वाल्व का सफल इलाज, आगरा में पहली बार, मेडिकल इतिहास में दर्ज हुई उपलब्धि

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एसएन मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के दौरान मौजूद डॉक्टर्स की टीम

                                                                                       
आगरा। सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। शनिवार, 9 अगस्त 2025 को कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हिमांशु यादव ने 40 वर्षीय मरीज के दिल के सिकुड़े हुए माइट्रल वाल्व (Mitral Stenosis) का बिना किसी चीर-फाड़ के सफल इलाज कर मेडिकल जगत में नई मिसाल कायम की। यह प्रक्रिया पूरी तरह नॉन-सर्जिकल थी और कॉलेज के इतिहास में पहली बार अंजाम दी गई।

लंबे समय से जूझ रहा था गंभीर बीमारी से

मरीज कई महीनों से सांस फूलने, थकान और पैरों में सूजन जैसी गंभीर समस्याओं से परेशान था। तमाम निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया। जांच के बाद पता चला कि मरीज के हृदय का माइट्रल वाल्व बेहद संकरा हो गया है, जिसके कारण हृदय से रक्त का प्रवाह बाधित हो रहा था। इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में माइट्रल स्टेनोसिस कहा जाता है।

बैलून माइट्रल वाल्वोटॉमी से खुला जीवन का रास्ता

डॉ. हिमांशु यादव और उनकी टीम ने मरीज के लिए Balloon Mitral Valvotomy तकनीक का चयन किया। इसमें फेमोरल नस के जरिए एक पतला कैथेटर हृदय के माइट्रल वाल्व तक पहुंचाया जाता है। इसके अग्रभाग में मौजूद विशेष बलून को वाल्व के संकरे हिस्से में धीरे-धीरे फुलाया गया, जिससे वाल्व चौड़ा हो गया और रक्त प्रवाह सामान्य हो गया।

कम दर्द, कम जोखिम, तेज़ रिकवरी

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी। परिणामस्वरूप मरीज को कम दर्द हुआ, जटिलताओं का जोखिम घटा और रिकवरी भी तेज़ रही।
“असाध्य रोग योजना” के अंतर्गत यह महंगी प्रक्रिया मरीज को पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। इलाज के महज़ दो दिन बाद ही मरीज स्वस्थ होकर घर लौट सका।

“हमारा लक्ष्य है कि आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्चस्तरीय सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं यहीं उपलब्ध हों, ताकि उन्हें दिल्ली, लखनऊ या जयपुर जैसे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। यह उपलब्धि हमारे कॉलेज की तकनीकी क्षमता और चिकित्सकों के समर्पण का प्रमाण है।”

डॉ. प्रशांत गुप्ता,प्राचार्य एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा

आधुनिक तकनीकों में लगातार सफलता

एसएन मेडिकल कॉलेज पहले ही पेसमेकर इम्प्लांटेशन, ब्रेन एंजियोग्राफी जैसी कई आधुनिक तकनीकों में सफलता हासिल कर चुका है। अब माइट्रल वाल्वोटॉमी की यह उपलब्धि इस श्रृंखला में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आगरा और ब्रज क्षेत्र के हृदय रोगियों को नई उम्मीद मिलेगी और उच्च गुणवत्ता का इलाज उनके अपने शहर में उपलब्ध हो सकेगा।

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